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अंतिम संस्कार में क्यों फोड़ा जाता है जलते हुए शव का सिर? पढ़ें इसके 3 मुख्य कारण

Published: Sun, 23 Aug 2026 06:00 PM (IST)Updated: Thu, 27 Aug 2026 09:42 AM (IST)

हिंदू धर्म के अंतिम संस्कार में 'कपाल क्रिया' एक जरूरी अनुष्ठान है, जिसमें जलते हुए शव की खोपड़ी को तोड़ा ...और पढ़ें

अंतिम संस्कार जलते हुए शव का सिर फोड़ने का रहस्य

अंतिम संस्कार जलते हुए शव का सिर फोड़ने का रहस्य

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में 16 संस्कारों में आखिरी संस्कार का नाम 'अंतिम संस्कार' है। यह संस्कार किसी की मृत्यु के बाद किया जाता है। हिंदू धर्म में जब शव को जलाते हैं तो सबसे आखिर में जलते हुए शव के सिर को डंडे से मारकर फोड़ा जाता है।

सनातन परंपरा में इसे 'कपाल क्रिया' के नाम से जाना जाता है। यह क्रिया अंतिम संस्कार का सबसे जरूरी हिस्सा माना जाता है। इसके बाद ही शव पंच तत्व में विलीन हो जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि, आखिर जलते हुए शव के सिर को डंडे से मारकर फोड़ा क्यों जाता है?

अंतिम संस्कार में जलते हुए शव का सिर क्यों फोड़ते हैं?

हिंदू धर्म में किसी भी इंसान की मौत होने के बाद उसके शव को अंतिम संस्कार के लिए अंत्येष्टि स्थल पर ले जाया जाता है। जहां मृतक व्यक्ति का पुत्र या परिवार से जुड़ा कोई सदस्य शव को मुखाग्नि देता है।

जब शव जल जाता है, तो इसी बीच उसकी खोपड़ी पर डंडे से मार जाता है। इससे सिर में एक गड्ढा हो जाता है, जिसमें फिर से घी डाला जाता है। इसके बाद शव का वह भाग भी जल जाता है। इसी क्रिया को कपाल क्रिया के नाम से जाना जाता है।

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कपाल क्रिया क्यों जरूरी?

मरने के बाद व्यक्ति के शव की कपाल क्रिया करने के पीछे तीन मुख्य कारण है। पहला कारण ये है कि, मुखाग्नि के बाद शरीर का बाकी हिस्सा जल जाता है, लेकिन सिर का भाग नहीं जलता है। ऐसे में पूरे शरीर को जलाने के लिए कपाल क्रिया को किया जाता है।

दूसरा कारण धार्मिक लिहाज से बेहद जरूरी माना जाता है। हिंदू मान्यताओं के मुताबिक, कपाल मोक्ष का द्वार होता है। ऐसे में अगर सिर का हिस्सा नहीं खुलने पर मृतक को मुक्ति नहीं मिलती है। ऐसे में कपाल क्रिया के जरिए मुक्ति का द्वार खोला जाता है।

इसका तीसरा कारण मृतक के कपाल यानी खोपड़ी को तांत्रिक क्रियाओं से बचाना। कपाल न जलने पर तांत्रिकों द्वारा उसका गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे में कपाल क्रिया के बाद संपूर्ण शरीर जलने पर ही परिजनों के श्मशान स्थल से घर लौटने की प्रथा है। ये कुछ ऐसे कारण हैं जिसके कारण आज भी हिंदू धर्म में शव को जलाने के बाद उसकी खोपड़ी को फोड़ने का रिवाज है।

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