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थाली में क्यों नहीं छोड़ना चाहिए जूठा दही? रामायण काल से जुड़ा है इसका गहरा रहस्य

Published: Wed, 09 Sep 2026 12:21 PM (IST)Updated: Thu, 10 Sep 2026 09:20 AM (IST)

दही हिंदू धर्म में शुभता और अनुष्ठानों का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इसके सेवन और गिरने से जुड़े कई शकुन-अपशकुन ...और पढ़ें

बची हुई दही की प्लेट से जुड़ी मान्यताएं

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। दही न केवल हमारे आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा है, बल्कि धर्म से जुड़े कई अनुष्ठानों में इसका इस्तेमाल किया जाता है। दही को शुभता से भी जोड़कर देखा जाता है। देवी-देवताओं को दही का भोग लगाया जाता है। पूजा में इस्तेमाल होने वाले पंचामृत में भी दही महत्वपूर्ण घटक के रूप में काम करता है।

दही से जुड़े कई शकुन और अपशकुन भी हैं जो हमें जीवन में शुभ और अशुभ संकेत देते हैं। इसके अलावा एक अपशकुन रामायण काल के रावण से भी जुड़ा है। आइए जानते हैं दही से जुड़े शकुन और अपशकुन के बारे में।

शास्त्रों में दही के सेवन के संदर्भ में कहा गया है। स्कंद पुराण के काशी खंड के अनुसार,

रात्रौ न दधि भोक्तव्यम्”

अर्थात्- रात के समय दही का सेवन नहीं करना चाहिए।

why leaving leftover curd is unlucky ravana ramayana myth and spiritual facts

(Picture Credits- AI Images)

दही से जुड़े शकुन

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ काम की शुरुआत करने से पहले दही और चीनी खिलाने की परंपरा रही है। माना जाता है कि दही चीनी खिलाने से काम में सफलता मिलने के साथ मन शांत होता है। इसके अलावा दही का सेवन ग्रहों की प्रतिकूलता को भी कम करने में मदद करता है।

ग्रह शास्त्र के अनुसार, जिस व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा कमजोर स्थिति में हो, उसे दही का सेवन लाभदायक साबित हो सकता है। इसी तरह राहु की शांति के लिए भी काले तिल और दही का दान करना सबसे असरदार उपाय माना जाता है।

दही से जुड़े अपशकुन

माना जाता है कि, दही का गिरना अशुभ संकेत होता है। मान्यता है कि दही का गिरना समृद्धि को कम करता है। दही का संबंध चंद्रमा से जुड़ा होता है। किसी भी काम के लिए घर से बाहर निकलने समय दही का गिरना बेहद अशुभ माना जाता है।

इसके अलावा बार-बार दही का गिरना इस बात का प्रतीक है कि घर पर कोई बड़ी समस्या आने वाली है। ऐसे में अगर गलती से भी दही गिर जाए तो सबसे पहले चंद्र देव से माफी मांगनी चाहिए। इसके अलावा इस बात का भी ध्यान रखें कि दही पर कभी भी पैर न रखें।

थाली में झूठा दही क्यों नहीं छोड़ना चाहिए?

थाली में जूठा दही छोड़ना भी अपशकुन माना जाता है। लोगों की बीच इसे लेकर मान्यता है कि, ऐसा करने से व्यक्ति की आयु कम होती है। इस घटना का संबंध रामायण काल से जुड़ा है, जब हनुमान जी माता सीता की खोज में लंका पहुंचते हैं और ढूंढते-ढूंढते रावण के महल में जाते हैं तो वहां हनुमान जी उसके भोजनालय में भी जाते हैं, जहां उन्हें रावण की जूठी थाली नजर आती है।

हनुमान जी उसे देखते ही समझ जाते हैं कि रावण का अंत नजदीक है। वाल्मीकि रामायण में बताया गया है कि रावण ने थाली में दही जूठा छोड़ा था और थाली में दही जूठा छोड़ने से आयु कम होती है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।