शिवलिंग पर हल्दी क्यों नहीं चढ़ाई जाती? जानें धार्मिक मान्यता और इसके पीछे का कारण
भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र, जल और दूध चढ़ाने का विशेष महत्व है, लेकिन शिवलिंग पर हल्दी चढ़ाना वर्जित माना गया है। जानिए इसके पीछे की धार्मिक मान्यत ...और पढ़ें
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शिवलिंग पर हल्दी चढ़ाने की मनाही क्यों? (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भगवान शिव को देवों के देव महादेव का दर्जा दिया गया है। धार्मिक मान्यताओं के आधार पर ब्रह्मा जी सृष्टि के रचयिता हैं, भगवान विष्णु पालनकर्ता हैं और महादेव संहारक माने जाते हैं। शिव भगवान बहुत कम में खुश हो जाते हैं। वह अपने भक्तों की थोड़ी सी भक्ति से भी प्रसन्न हो उठते हैं। इसी वजह से शिवभक्त पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ उनकी पूजा-अर्चना करते हैं।
भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र, धतूरा, भांग, गंगाजल, जल, चंदन और कच्चा दूध अर्पित करने की परंपरा है। लेकिन, क्या आपने कभी ये सुना है कि किसी ने शिव जी को हल्दी चढ़ाई हो। शायद नहीं, ऐसा इसलिए क्योंकि शास्त्रों में शिवलिंग पर चढ़ाना वर्जित माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग पर हल्दी चढ़ाने से भगवान शिव नाराज हो सकते हैं। लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर शिवलिंग पर हल्दी क्यों नहीं चढ़ाई जाती। चलिए इस आर्टिकल में हम यही जानेंगे कि आखिर ये मान्यता क्यों है।
भगवान विष्णु की पूजा में होता है हल्दी का इस्तेमाल
एक ओर जहां भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की पूजा में हल्दी का इस्तेमाल अत्यंत शुभ माना गया है। वहीं, लोक परंपराओं से जुड़ी मान्यता है कि, हल्दी का उपयोग मुख्य रूप से महिलाओं के श्रृंगार और सौंदर्य से जुड़ी चीजों में किया जाता है। इसी कारण शिवलिंग पर हल्दी अर्पित नहीं की जाती और शिवलिंग को पुरुष तत्व का प्रतीक माना गया है।

(Image Source: Freepik)
शिव जी को चढ़ती हैं ठंडी चीजें
इसके अलावा, धार्मिक मान्यताएं और शिव पूजा परंपराएं यह भी कहती है कि हल्दी की तासीर गर्म होती है, जबकि भगवान शिव को शीतल वस्तुएं (ठंडी चीजें) अधिक प्रिय हैं। इसलिए शिवलिंग पर हमेशा ठंडी चीजों का ही चढ़ावा चढ़ाया जाता है। भोलेनाथ को उनके भक्त जल, गंगाजल, चंदन, दूध, बेलपत्र और भांग अर्पित करते हैं, जिससे भगवान शिव प्रसन्न होते हैं।
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क्या जलधारी पर चढ़ सकती है हल्दी?
हालांकि, शिवलिंग पर हल्दी चढ़ाना वर्जित माना गया है, लेकिन जलधारी पर हल्दी अर्पित की जा सकती है। मान्यता है कि शिवलिंग का ऊपरी भाग भगवान शिव का प्रतीक होता है, जबकि जलधारी मां पार्वती का स्वरूप मानी जाती है। इसी कारण भक्त मां पार्वती को प्रसन्न करने के लिए जलधारी पर हल्दी चढ़ाते हैं।
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