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    सोमवार और चतुर्दशी पर क्यों नहीं तोड़ने चाहिए बेलपत्र, शिवपुराण में लिखी इस बात का महत्व क्या है?

    Updated: Wed, 29 Jul 2026 08:00 AM (IST)

    भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का विशेष महत्व है, लेकिन इसे तोड़ने के कुछ खास नियम हैं। शिवपुराण के अनुसार, सोमवार और चतुर्दशी जैसी कुछ तिथियों पर बेलप ...और पढ़ें

    किस दिन बेलपत्र नहीं तोड़ने चाहिए, शिवपुराण में लिखी बात का महत्व

    किस दिन बेलपत्र नहीं तोड़ने चाहिए, शिवपुराण में लिखी बात का महत्व

    HighLights

    1. सोमवार, चतुर्दशी पर बेलपत्र तोड़ना वर्जित।

    2. बेलपत्र एक दिन पहले तोड़कर रख सकते हैं।

    3. शिवपुराण में बेलपत्र को पवित्र बताया गया है।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का विशेष महत्व होता है। इस दौरान भगवान शिव के भक्त महादेव को प्रसन्न करने के लिए पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ बेलपत्र अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और इसके बिना शिव जी की पूजा अधूरी मानी जाती है।

    मुख्य रूप से सोमवार के दिन शिव जी को बेलपत्र चढ़ाना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। कई बार लोग सोमवार के दिन बेलपत्र तोड़ते हैं और इसे शिवलिंग को अर्पित करते हैं।

    अगर हम बेलपत्र तोड़ने के नियमों की बात करें तो इसके लिए कुछ विशेष नियम शिवपुराण में बताए गए हैं। आइए आपको बताते हैं कि सोमवार और चतुर्दशी पर बेलपत्र तोड़ने के नियम क्या हैं और ऐसा शास्त्रों में क्यों कहा गया है कि इन दिनों में इसे तोड़ने से बचना चाहिए।

    किन विशेष तिथियों में नहीं तोड़ना चाहिए बेलपत्र

    मान्यता है कि सोमवार, चतुर्दशी तिथि, अमावस्या, अष्टमी और नवमी तिथि को बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए। विशेष रूप से जो भक्त सोमवार का व्रत रखते हैं, उन्हें रविवार के दिन ही बेलपत्र तोड़कर रख लेने की सलाह दी जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित होता है और इस दिन बेलपत्र तोड़ना शास्त्रों में उचित नहीं माना गया है।

    सोमवार को बेलपत्र तोड़ने की मनाही क्यों है?

    हिंदू धर्म में प्रत्येक दिन और तिथि का अपना धार्मिक महत्व होता है। मुख्य रूप से सोमवार का दिन भगवान शिव का प्रिय दिन माना जाता है और इस दिन शिव भक्त पूजन और व्रत करते हैं और उन्हें बेलपत्र चढ़ाते हैं।

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    इस दिन आपको भूलकर भी बेलपत्र तोड़ना नहीं चाहिए। यदि आपको सोमवार के दिन बेलपत्र शिवलिंग पर चढ़ाने हैं तो इसे एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें। ऐसा कहा जाता है कि बेलपत्र कभी बासी नहीं होता है और आप इसे पहले से ही तोड़कर रख सकते हैं।

    शिव पूजन में बेलपत्र का महत्व?

    शिवपुराण में बेलपत्र को पवित्र बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि बेलपत्र की तीन पत्तियां भगवान शिव के तीन गुणों सत्व, रज और तम का प्रतीक होती हैं। अगर कोई भक्त सच्चे मन से शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करता है तो भगवान शिव उसकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं और जीवन में सुख-शांति का आशीर्वाद बना रहता है।

    बेलपत्र केवल पूजा की सामग्री नहीं है, बल्कि यह श्रद्धा, विश्वास और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि शिव भक्त इसे बहुत सम्मान के साथ भगवान शिव को अर्पित करते हैं।

    शिवपुराण में बताए गए नियमों का पालन करते हुए अगर आप बेलपत्र तोड़ें तो यह अत्यंत शुभ माना जाता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।