अंतिम संस्कार के बाद क्यों जरूरी है गंगा में अस्थि विसर्जन? जानिए इसके पीछे का धार्मिक और आध्यात्मिक कारण
हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद अस्थियों का गंगा नदी में विसर्जन एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। यह माना जाता है ...और पढ़ें
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गंगा में अस्थियां क्यों विसर्जित की जाती हैं? (Picture Credits- AI Images)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो उसका अंतिम संस्कार पूरी विधि-विधान के साथ किया जाता है। ऐसा करना महज परंपरा का हिस्सा ही नहीं, बल्कि एक गहरा धार्मिक अनुष्ठान है।
अंतिम संस्कार करने के बाद अस्थियों को पवित्र गंगा नदी में विसर्जित कर दिया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर गंगा नदी में ही क्यों अंतिम संस्कार किया जाता है? आइए समझते हैं इसके पीछे का आध्यात्मिक कारण और महत्व।
अंतिम संस्कार में पंच तत्वों का महत्व
हिंदू दर्शन शास्त्र और गरुड़ पुराण के मुताबिक, मानव शरीर पंच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) से मिलकर बना है और जब किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है तो वो उन्हीं पच तत्वों में विलीन हो जाता है।
ऐसे में जब अंतिम संस्कार के दौरान जब शरीर जलकर राख हो जाता है, तब अस्थियां तीन दिन के अंदर चुन ली जाती है। इसके बाद 10 दिन के अंदर अस्थियों को गंगा या किसी भी पवित्र नदी में विसर्जित कर दिया जाता है।
अस्थि विसर्जन गंगा नदी में ही क्यों?
सनातन धर्म और पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, मां गंगा को मोक्षदायिनी का दर्जा प्राप्त है। पद्म पुराण के स्वर्ग खंड अध्याय में गंगा में अस्थि विसर्जन के महत्व पर जोर देते हुए कहा गया है कि,
यावदस्थीनी गंगायां तिष्ठन्ति पुरुषस्य च।तावद् वर्ष सहस्त्राणि स्वर्गलोके महीयते॥
अर्थात्- अंतिम संस्कार के बाद मनुष्य की अस्थियां जब तक गंगा या नर्मदा नदी में स्थित रहती हैं, तब तक वह हजारों सालों तक स्वर्ग लोक में निवास करती है।

गंगा क्यों हैं मोक्षदायिनी?
पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, जब राजा भागीरथ अपनी तपस्या के दम पर गंगा को स्वर्ग से पृ्थ्वी पर लेकर आए थे ताकि उनके पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति हो सके। इसी कारण से गंगा नदी को मोक्षदायिनी का दर्जा प्राप्त है।
ऐसा भी माना जाता है कि, पवित्र गंगा नदी में अस्थियों को विसर्जन करने से मृत व्यक्ति की आत्मा को केवल स्वर्ग ही नहीं, बल्कि ब्रह्मलोक तक की प्राप्ति हो सकती है। इसके अलावा मरने के बाद आत्मा को वह स्थान प्राप्त होता है, जहां पुनर्जन्म का नियम नहीं होता है और आत्मा को मृत्यु के पश्चात परम शांति मिलती है।
गंगा नदी महज सामान्य नदी से बढ़कर है, क्योंकि हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले लोग इसे मां गंगा के रूप में पूजते हैं, जो स्वर्ग से अवतरित हुई हैं। ऐसा माना जाता है कि, गंगा नदी शारीरिक और आध्यात्मिक दोनों तरह के पापों को धो देती है। अस्थि विसर्जन अनुष्ठान करने के लिए हरिद्वार, वाराणसी और प्रयागराज सबसे पवित्र स्थानों में शामिल है, जिनमें हरिद्वार खासतौर पर महत्वपूर्ण है।
गंगा में अस्थियां विसर्जित करने का आध्यात्मिक लाभ
हिंदू मान्यताओं के मुताबिक, अंतिम संस्कार और अस्थि विसर्जन विधिवत संपन्न होने तक आत्मा पृथ्वी पर ही भटकती रहती है। गंगा में अस्थि विसर्जन से आत्मा सांसारिक बंधनों से मुक्त हो जाती है और परलोक की यात्रा में सहायता प्राप्त करती है, जिससे आखिर में मोक्ष की प्राप्ति होती है।
ऐसा माना जाता है कि, यदि राख को विसर्जित न किया जाए या अनुष्ठान पूरा न हो, तो आत्मा नकारात्मक ऊर्जा से घिरी रहती है। गंगा में राख विसर्जन के बाद आत्मा आध्यात्मिक रूप से शुद्ध हो जाती है, जो उसे नकारात्मक ऊर्जा से बचाने के साथ शांति पूर्ण ढंग से आगे बढ़ने में मदद करती है।
वैसे देखा जाए तो अस्थियों को किसी भी पवित्र नदी में विसर्जित किया जा सकता है, लेकिन गंगा नदी को इसके दिव्य उद्गम, आध्यात्मिक शक्ति और हिंदू धर्मग्रंथों में ऐतिहासिक महत्व प्राप्त है, जिस वजह से गंगा नदी में अस्थियां विसर्जित करना बेहद शुभ माना जाता है।
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