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आपके जीवन की डोर असल में किसके हाथ में है? गीता के इन 3 श्लोकों में श्रीकृष्ण ने खोला सबसे बड़ा रहस्य

Published: Mon, 26 Oct 2026 07:00 AM (IST)

श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने जीवन के गहरे रहस्यों को समझाया है, जिसमें प्रकृति से उत्पन्न तीन गुणों - सत्त्व, ...और पढ़ें

प्रकृति के 3 गुण कैसे चलाते हैं आपका पूरा जीवन (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में श्रीमद्भगवद्गीता एक धार्मिक और महत्वपूर्ण ग्रंथ है। श्रीमद्भगवद्गीता में श्लोकों के द्वारा भगवान श्रीकृष्ण ने जीवन, कर्म, धर्म, ज्ञान और आत्मा से जुड़े रहस्यों को सरल तरीके से समझाया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गीता में बताई बातों को जीवन में अपनाने से सफलता के मार्ग खुलते हैं और सुख-दुख में समान भाव बनाए रखने की प्रेरणा मिलती है।

गीता के 14वें अध्याय में भगवान बताते हैं कि सत्त्व, रज और तम प्रकृति से उत्पन्न तीन गुण हैं, जो आत्मा को शरीर से बांधकर रखते हैं। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको गीता के 3 श्लोकों के माध्यम से बताएंगे कि प्रकृति के 3 गुण हमारा जीवन कैसे चलाते हैं?

सत्त्वं रजस्तम इति गुणाः प्रकृतिसम्भवाः।
निबध्नन्ति महाबाहो देहे देहिनमव्ययम् ॥

गीता के इस श्लोक के द्वारा भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि हे महाबाहु अर्जुन, प्रकृति से उत्पन्न होने वाले तीनों गुण सत्त्व, रज और तम हैं। ये तीनों गुण अविनाशी जीवात्मा को शरीर में बांध देते हैं।

मुख्य संदेश

इस श्लोक का मुख्य संदेश है कि प्रकृति से उत्पन्न तीन गुण हैं। जब व्यक्ति की आत्मा प्रकृति के संपर्क में आती है, तो ये तीनों गुण उसे मोह और सुख-दुःख के जाल में बांध देते हैं।

मम योनिर्महद्ब्रह्म तस्मिन् गर्भं दधाम्यहम्।
संभवः सर्वभूतानां ततो भवति भारत॥

भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि हे अर्जुन, मूल प्रकृति संपूर्ण भूत-प्राणियों की योनि है। मैं उसमें चेतन रूपी बीज स्थापित करता हूं, जिससे सभी प्राणियों की उत्पत्ति होती है।

मुख्य संदेश

भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि यह भौतिक प्रकृति एक गर्भ के समान है और परमात्मा उसमें आत्मा का बीज डालते हैं। जड़ प्रकृति और चेतन परमात्मा के इसी संयोग से संसार के सभी चराचर जीवों का जन्म होता है।

तत्र सत्त्वं निर्मलत्वात्प्रकाशकमनामयम् ।
सुखसङ्गेन बध्नाति ज्ञानसङ्गेन चानघ ॥

इस श्लोक में कृष्ण कहते हैं कि हे अर्जुन, उन तीन गुणों में सत्त्वगुण निर्मल होने की वजह से प्रकाश करने वाला और दुख-रहित है। वह सुख की आसक्ति और ज्ञान की आसक्ति से मनुष्य को बांध लेता है।

मुख्य संदेश

भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि प्रकृति के तीनों गुणों में 'सत्त्वगुण' सबसे शुद्ध और सकारात्मक है, जो मनुष्य को ज्ञान, शांति और सुख देता है। लेकिन यह भी एक प्रकार का बंधन ही है। जब मनुष्य को अपने ज्ञान, अच्छे कर्मों और सुख-सुविधाओं से मोह या अहंकार हो जाता है, तो सत्त्वगुण भी आत्मा को उसी सुख और ज्ञान के चक्र में बांध लेता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।