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शरीर के बाल खोलते हैं किस्मत के राज! जानिए क्या कहते हैं आपके रोम

Published: Sun, 30 Aug 2026 01:41 PM (IST)

सामुद्रिक शास्त्र शरीर के रोमों की बनावट, रंग और संख्या के आधार पर व्यक्ति के स्वभाव, व्यक्तित्व और भविष्य का ...और पढ़ें

सामुद्रिक शास्त्र में शरीर के बालों का अर्थ (Picture Credits- AI Images)

सामुद्रिक शास्त्र में शरीर के बालों का अर्थ (Picture Credits- AI Images)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सामुद्रिक शास्त्र भारतीय वैदिक ज्योतिष पर आधारित एक ऐसा विज्ञान जिसमें मनुष्य के शरीर की बनावट, अंगों के आकार, तिलों और रेखाओं का अध्ययन करके स्वभाव, व्यक्तित्व और भविष्य से जुड़े संकेतों का आकलन किया जाता है।

इसमें सिर्फ चेहरे, आंखें या हाथ-पैर ही नहीं, बल्कि शरीर पर मौजूद रोम यानी बालों को भी जरूरी माना गया है। सामुद्रिक शास्त्र में दिए गए श्लोकों में रोमों की कोमलता, उनके रंग, संख्या और बनावट के आधार पर कई तरह की बातें कही गई हैं।

सुंदर, मुलायम और काले रोम

सामुद्रिक शास्त्र के श्लोक- ललितानि स्निग्धानि भ्रमरश्यामानि देहरोमाणि । जायन्ते भूमिभुजां मृदूनि विलसन्ति सूक्ष्माणि ॥

इस श्लोक में राजाओं और श्रेष्ठ पुरुषों के शरीर के रोमों के बारे में बताया गया है। अगर शरीर पर रोम, पतले, सुंदर, चिकने और चमकदार हों तो इसे अच्छा माना जाता है। ऐसे रोम वाला व्यक्ति दिखने में काफी सुंदर और आकर्षणवान होता है।

सामुद्रिक शास्त्र के श्लोक- सुभगो रोमयुतः स्याद्विद्वान्धनरोमसंयुतो मनुजः । उद्धृत्तरोमभिः पुनरङ्गैर्बहुभिश्च वित्तसंकलितः ।।

इस श्लोक में बताया गया है कि, जिस व्यक्ति के शरीर पर रोम काफी ज्यादा हों, उसे विद्वान, सुंदर और आकर्षक माना गया है। इसके अलावा शरीर पर अधिक रोम होना धन से भी जुड़ा माना गया है। सामुद्रिक शास्त्र की मान्यताओं के मुताबिक ऐसे रोम वाला व्यक्ति अधिक धनवान भी होता है।

सामुद्रिक शास्त्र में शरीर के बालों का अर्थ

एक रोम और दो रोम का अंतर

रोमाकै नृपतेर्द्वं श्रोत्रियधनाढयबुद्धिमताम्, आदीन्येतानि पुनर्निःस्वानां मूर्धजेष्वेवम् ॥

सामुद्रिक शास्त्र के इस श्लोक में कहा गया है कि, राजा के शरीर में एक ही जगह से एक-एक रोम निकलने की बात कही गई है। जबकि वेद का ज्ञान, धन और बुद्धिमान व्यक्ति के एक स्थान से दो-दो रोम देखने को मिल सकते हैं। सामुद्रिक शास्त्र में रोमों की संख्या और उनकी बनावट भी व्यक्ति के भाग्य से संबंध रखती है।

शरीर पर रोम न होना क्या बताता है?

रोमरहितः परिव्रात् स्यादधमः स्थूलरूक्षखररोमा । पापः पिङ्गलरोमा निःस्वः स्फुटिताग्ररोमापि ॥

इस श्लोक में रोम रहित व्यक्ति के बारे में बताया गया है। श्लोक में कहा गया है कि, जिस पुरुष के शरीर पर रोम न हों, उसे संन्यासी या भिक्षु स्वभाव वाला माना गया है।

इसके अलावा मोटे और खुरदरे रोमों को सही नहीं माना गया है। वहीं पीले या भूरे रंग के रोमों को भी नकारात्मक संकेत माना जाता है। ऐसे रोम जिनके सिरे फटे या टूटे हुए दिखाई देते हैं, इन्हें निर्धनता और आर्थिक परेशानी से जोड़ा गया है।

सामुद्रिक शास्त्र में बताई बातें प्राचीन परंपराओं पर आधारित थीं। इसलिए किसी व्यक्ति के सिर्फ शरीर के रोम देखकर उसके व्यक्तित्व या भविष्य का सही फैसला नहीं लिया जा सकता है।

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