नीलम से लेकर पुखराज तक: पहनने के बाद कब शुरू होता है रत्नों का असली प्रभाव?
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रत्न ब्रह्मांडीय ऊर्जा का स्रोत होते हैं और प्रत्येक रत्न का असर दिखाने का समय ...और पढ़ें
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रत्न अपना असर कितने समय में दिखाते हैं?

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में रत्नों को हमेशा से ऊर्जा और शक्ति का साधन बताया गया है। रत्नों को लेकर मान्यता है कि, इनमें ब्रह्मांडीय ऊर्जा समाहित होती है, जो मानव सभ्यता की शुरुआत से ही चली आ रही है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में नौ ग्रह को जिक्र किया गया है, जिनमें से प्रत्येक ग्रह का मनुष्य के जीवन में अहम स्थान होता है।
हर ग्रह को एक खास रत्न द्वारा दर्शाया जाता है, जिस वजह से इन्हें नौ रत्न कहा जाता है। माना जाता है कि, इन रत्नों में उपचारात्मक गुण और ज्योतिषीय लाभ होते हैं, जो सही उंगली में धारण करने से सही ऊर्जा प्रदान करते हैं। अक्सर लोगों को यह जानना कि इच्छा होती है कि, आखिर रत्न अपना असर दिखाने में कितना समय लेता है?
ज्योतिष शास्त्र में रत्नों का महत्व
कभी भी रत्न खरीदने से पहले इस बात का जरूर ध्यान रखें कि, बिना ज्योतिषीय परामर्श या जानकारी के रत्न न खरीदें और न ही धारण करें। रत्न दिखने में सुंदर, चमकीले पत्थर होते हैं जिनका इस्तेमाल प्राचीन समय से ही भेंट और आभूषण बनाने के लिए किया जाता था।
ऐसा माना जाता था कि, हर रत्न में एक शक्तिशाली ऊर्जा होती है, जो इसे पहनने वाले को नकारात्मक ऊर्जा से बचाती है और सकारात्मक ऊर्जा को शक्ति प्रदान करती है।
प्रत्येक रत्न असर दिखाने में कितना समय लेता है?
ज्योतिष और रत्न शास्त्र के अनुसार, प्रत्येक रत्न का असर दिखाने का समय एक दूसरे से अलग होता है। माना जाता है कि, कुछ रत्न शुरुआत के 5 से 7 दिनों असर दिखाना शुरू कर देते हैं, जबकि कुछ रत्नों को 10 से 15 दिन का भी समय लगता है।
इसमें नीलम जो शनि ग्रह से जुड़ा है इसे अपना असर दिखाने में करीब 24 से 72 घंटे का समय लग सकता है।
लहसुनिया जो केतु का रत्न है, करीब 24 से 48 घंटे में असर दिखाता है।
मोती चंद्रमा का रत्न जिसे 2 से 3 दिन का समय लगता है।
मंगल का रत्न मूंगा जो आमतौर पर 7 से 10 दिन में असर दिखाता है।
पन्ना जिसे बुध से जुड़ा रत्न माना जाता है, इसे 5 से 7 दिन का समय लग सकता है।
पुखराज बृहस्पति का रत्न जो 7 से 15 दिनों में असर दिखाता है।
माणिक्य को सूर्य का रत्न माना जाता है, जो 7 से 15 दिनों के भीतर अपना असर दिखाता है।
हीरा शुक्र का रत्न माना जाता है, जो 10 से 15 दिनों का समय लेता है।
गोमेद जिसे राहु से जुड़ा रत्न माना जाता है, 10 से 15 दिन इसे भी असर दिखाने में लगता है।
रत्न का असर कैसे पता करें?
अगर आप ज्योतिषी की सलाह पर सही रत्न धारण करते हैं, तो कुछ संकेतों के जरिए आप पता लगा सकते हैं कि, यह काम कर रहा है या नहीं।
सबसे पहले मन शांत होने लगेगा। बेवजह के तनावों में मन विचलित नहीं होगा। नींद बेहतर होगी। किसी भी मामले में फैसला लेना चुनौती भरा नहीं लगेगा। मानसिक और शारीरिक स्तर पर खुद में सकारात्मक ऊर्जा महसूस करेंगे। ऐसे कई बदलाव जो आपके सोचने, समझने और कार्य करने की क्षमता पर अच्छा प्रभाव दिखा रहे हैं, इसका मतलब रत्न का असर शुरू हो चुका है।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
