बरगद की परिक्रमा और वो 7 धागे: वट सावित्री पर सुहागिनों के लिए क्यों जरूरी है यह रस्म?
वट सावित्री व्रत पर बरगद के पेड़ पर 7 बार कच्चा सूत क्यों बांधा जाता है? आइए यहां जानते हैं। ...और पढ़ें

Vat Savitri Vrat 2026: बरगद के पेड़ पर क्यों बांधा जाता है 7 बार सूत? (Ai Generated Image)
HighLights
बरगद की पूजा पति की लंबी आयु के लिए की जाती है
सूत के 7 फेरे विवाह के 7 वचनों और सात जन्मों के अटूट बंधन को दोहराते हैं
वट वृक्ष में साक्षात त्रिदेवों का वास माना गया है, जो रक्षक की भूमिका निभाते हैं
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में वट यानी बरगद के वृक्ष को अक्षय माना गया है, जिसका कभी अंत नहीं होता। पौराणिक कथाओं के अनुसार, सावित्री ने इसी वृक्ष के नीचे अपने दृढ़ संकल्प और पतिव्रत धर्म से यमराज को विवश कर दिया था और अपने पति सत्यवान के प्राण वापस ले आई थीं। तभी से सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए बरगद की पूजा करती हैं।
वहीं, इस पूजा का सबसे अहम हिस्सा है बरगद की परिक्रमा के दौरान 7 बार कच्चा सूत बांधना। कहते हैं कि इसके साथ ही पूजा पूर्ण मानी जाती है, तो इस आर्टिकल में इसके महत्व को समझते हैं।
7 बार सूत बांधने का धार्मिक महत्व

सात जन्मों का बंधन
हिंदू धर्म में सात के अंक को बहुत पवित्र माना गया है। जैसे शादी के समय सात फेरे लेकर सात जन्मों का साथ निभाने का वचन दिया जाता है, वैसे ही बरगद पर 7 बार कच्चा सूत लपेटना इस बात का प्रतीक है कि पति-पत्नी का रिश्ता सात जन्मों तक अटूट बना रहे।
त्रिदेवों का वास
शास्त्रों के अनुसार, बरगद के वृक्ष की जड़ में ब्रह्मा, तने में विष्णु और शाखाओं में शिव का वास होता है, जब महिलाएं वृक्ष पर सूत लपेटती हैं, तो वे एक तरह से त्रिदेवों को साक्षी मानकर अपने सुहाग की रक्षा का वचन मांगती हैं। यह धागा एक रक्षा सूत्र की तरह काम करता है।
सावित्री के संकल्प का प्रतीक
सूत का धागा कच्चा होता है, लेकिन जब इसे कई बार लपेटा जाता है, तो यह बहुत मजबूत हो जाता है, जो इस बात को दिखाता है कि प्यार और विश्वास का धागा भले ही नाजुक हो, लेकिन संकल्प की शक्ति उसे अटूट बना देती है, जैसा सावित्री का संकल्प था।
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परिक्रमा का महत्व
वृक्ष की परिक्रमा करना पवित्र ऊर्जा पाने का एक तरीका है। कहते हैं कि बरगद का पेड़ सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र होता है। परिक्रमा करते समय महिलाएं मौन रहकर या मंत्रोच्चार करते हुए अपने परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करती हैं, जिससे उनकी मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति बढ़ती है।
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