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    खुशहाल शादीशुदा जिंदगी के लिए प्रदोष पर ऐसे करें मां गौरी का पूजन, दूर होंगे सभी क्लेश

    Updated: Sun, 26 Apr 2026 12:06 PM (GMT+05:30)

    वैशाख माह का प्रदोष व्रत (Vaishakh Pradosh 2026) वैवाहिक जीवन की सुख-शांति के लिए बहुत शुभ माना जाता है। ...और पढ़ें

    वैशाख माह का दूसरा प्रदोष व्रत: मां गौरी की पूजा से वैवाहिक जीवन में घुलेगी मिठास।


    वैशाख माह का दूसरा प्रदोष व्रत: मां गौरी की पूजा से वैवाहिक जीवन में घुलेगी मिठास।

    HighLights

    1. प्रदोष व्रत पर मां पार्वती और महादेव की पूजा का महत्व है


    2. इस दिन व्रत रखने से वैवाहिक क्लेश से मुक्ति मिलती है

    3. इस दिन मां गौरी को शृंगार की सामग्री चढ़ाना बेहद मंगलकारी होता है

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की कृपा पाने का सबसे बड़ा दिन माना जाता है। वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को पड़ने वाला प्रदोष व्रत आध्यात्मिक और पारिवारिक शांति के लिए खास है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं और इस समय मां गौरी की आराधना करने से वैवाहिक जीवन के सभी कष्टों का अंत होता है। वहीं, इस दिन गौरी चालीसा का पाठ परमकल्याणकारी माना गया है।

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    कैसे करें पूजन?

    • प्रदोष व्रत की मुख्य पूजा सूर्यास्त के समय यानी प्रदोष काल में की जाती है।
    • इस समय स्नान के बाद साफ वस्त्र धारण करें।
    • पूजा स्थल पर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें।
    • मां गौरी को लाल चुनरी, सिंदूर, चूड़ियां और अन्य शृंगार की सामग्री अर्पित करें। ऐसा माना जाता है कि माता को सुहाग का सामान चढ़ाने से वैवाहिक जीवन सुखी रहता है।
    • महादेव का जलाभिषेक करें और मां गौरी को अक्षत व पुष्प चढ़ाएं।
    • घी का दीपक जलाएं और माता को खीर या सफेद मिठाई का भोग लगाएं।
    • गौरी चालीसा का पाठ करें और अंत में आरती करें।

    ।।गौरी चालीसा।।

    चौपाई

    मन मंदिर मेरे आन बसो,

    आरम्भ करूं गुणगान,

    गौरी माँ मातेश्वरी,

    दो चरणों का ध्यान।

    पूजन विधि न जानती,

    पर श्रद्धा है अपार,

    प्रणाम मेरा स्वीकारिये,

    हे माँ प्राण आधार।

    नमो नमो हे गौरी माता,

    आप हो मेरी भाग्य विधाता,

    शरणागत न कभी घबराता,

    गौरी उमा शंकरी माता।

    आपका प्रिय है आदर पाता,

    जय हो कार्तिकेय गणेश की माता,

    महादेव गणपति संग आओ,

    मेरे सकल क्लेश मिटाओ।

    सार्थक हो जाए जग में जीना,

    सत्कर्मो से कभी हटूं ना,

    सकल मनोरथ पूर्ण कीजो,

    सुख सुविधा वरदान में दीज्यो।

    हे माँ भाग्य रेखा जगा दो,

    मन भावन सुयोग मिला दो,

    मन को भाए वो वर चाहूं,

    ससुराल पक्ष का स्नेहा मैं पायु।

    परम आराध्या आप हो मेरी,

    फ़िर क्यों वर में इतनी देरी,

    हमरे काज सम्पूर्ण कीजियो,

    थोडे़ में बरकत भर दीजियो।

    अपनी दया बनाए रखना,

    भक्ति भाव जगाये रखना,

    गौरी माता अनसन रहना,

    कभी न खोयूं मन का चैना।

    देव मुनि सब शीश नवाते,

    सुख सुविधा को वर मैं पाते,

    श्रद्धा भाव जो ले कर आया,

    बिन मांगे भी सब कुछ पाया।

    हर संकट से उसे उबारा,

    आगे बढ़ के दिया सहारा,

    जब भी माँ आप स्नेह दिखलावे,

    निराश मन में आस जगावे।

    शिव भी आपका काहा ना टाले,

    दया दृष्टि हम पे डाले,

    जो जन करता आपका ध्यान,

    जग में पाए मान सम्मान।

    सच्चे मन जो सुमिरन करती,

    उसके सुहाग की रक्षा करती,

    दया दृष्टि जब माँ डाले,

    भव सागर से पार उतारे।

    जपे जो ओम नमः शिवाय,

    शिव परिवार का स्नेहा वो पाए,

    जिसपे आप दया दिखावे,

    दुष्ट आत्मा नहीं सतावे।

    सात गुण की हो दाता आप,

    हर इक मन की ज्ञाता आप,

    काटो हमरे सकल क्लेश,

    निरोग रहे परिवार हमेशा।

    दुख संताप मिटा देना माँ,

    मेघ दया के बरसा देना माँ,

    जबही आप मौज में आय,

    हठ जय माँ सब विपदाएं।

    जिस पे दयाल हो माता आप,

    उसका बढ़ता पुण्य प्रताप,

    फल-फूल मै दुग्ध चढ़ाऊ,

    श्रद्धा भाव से आपको ध्यायु।

    अवगुण दृष्टि दृष्टि दृष्टि मेरे ढक देना माँ,

    ममता आंचल कर देना मां,

    कठिन नहीं कुछ आपको माता,

    जग ठुकराया दया को पाता।

    बिन पाऊ न गुन माँ तेरे,

    नाम धाम स्वरूप बहू तेरे,

    जितने आपके पावन धाम,

    सब धामो को मां प्राणम।

    आपकी दया का है ना पार,

    तभी को पूजे कुल संसार,

    निर्मल मन जो शरण में आता,

    मुक्ति की वो युक्ति पाता।

    संतोष धन्न से दामन भर दो,

    असम्भव को माँ सम्भव कर दो,

    आपकी दया के भारे,

    सुखी बसे मेरा परिवार।

    आपकी महिमा अति निराली,

    भक्तो के दुःख हरने वाली,

    मनोकामना पुरन करती,

    मन की दुविधा पल मे हरती।

    चालीसा जो भी पढें सुनाया,

    सुयोग वर् वरदान में पाए,

    आशा पूर्ण कर देना माँ,

    सुमंगल साखी वर देना माँ।

    गौरी माँ विनती करूँ,

    आना आपके द्वार,

    ऐसी माँ कृपा किजिये,

    हो जाए उद्धार।

    हीं हीं हीं शरण में,

    दो चरणों का ध्यान,

    ऐसी माँ कृपा कीजिये,

    पाऊँ मान सम्मान।

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