वैशाख अमावस्या के दिन सूर्य और चंद्रमा बनाएंगे दुर्लभ युति, आप पर क्या पड़ेगा असर?
17 अप्रैल 2026 को वैशाख अमावस्या पर सूर्य और चंद्रमा की दुर्लभ युति होगी। ज्योतिष शास्त्र में इसे अत्यंत प्रभावशाली माना गया है, जो पितरों के तर्पण, द ...और पढ़ें

अमावस्या पर बन रहा महासंयोग (AI Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
दिव्या गौतम, एस्ट्रोपत्री। ज्योतिष शास्त्र में अमावस्या की तिथि का विशेष महत्व है, और इस वर्ष 17 अप्रैल 2026 को वैशाख अमावस्या (Vaishakh Amavasya 2026 Date) के दिन सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि में आकर युति बनाएंगे। जब सूर्य और चंद्रमा एक साथ होते हैं, तो चंद्रमा का प्रकाश पूर्णतः लुप्त हो जाता है, जिसे खगोलीय और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।
अमावस्या की यह तिथि पितरों के तर्पण, दान और आत्म-मंथन के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी गई है। सूर्य की प्रचंड ऊर्जा और चंद्रमा की शीतलता का यह मिलन हमारे मन और आत्मा के बीच एक गहरा संतुलन बनाने का अवसर प्रदान करता है। इस दिन किया गया पूजन और शुभ संकल्प हमारे जीवन के संचालन को नई गति और सकारात्मकता प्रदान करता है।
सूर्य और चंद्रमा की युति: मन और आत्मा का मिलन
सूर्य को आत्मा का आधार और चंद्रमा को मन का आधार माना जाता है। अमावस्या पर जब ये दोनों ग्रह मिलते हैं, तो मन की चंचलता शांत होने लगती है और व्यक्ति को अपने अंदर की आवाज सुनने का अवसर मिलता है। इसे पूरी तरह गलत कहना सही नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा समय है जब नए बदलाव की तैयारी की जाती है।
चंद्रमा की कम होती शक्ति हमें धीरज रखने और शांत रहकर योजना बनाने की सीख देती है। इस समय की गई प्रार्थना व्यक्ति को मानसिक रूप से मजबूत बनाती है। यह मिलन हमें अपनी पुरानी गलतियों को सुधारने और नए संकल्पों के साथ जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
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सूर्य और चंद्रमा की युति: दान और पूजन का महत्व
अमावस्या के दिन सूर्य-चंद्र के मिलन के समय किया गया दान बहुत फल देता है और जीवन की रुकावटों को दूर करने में मदद करता है। इस दिन पितरों के नाम पर जल, तिल और अन्न का दान करना सबसे बड़ा पुण्य है, जिससे घर में सुख-शांति बनी रहती है। जल से भरे बर्तन का दान और जरूरतमंदों को सात्विक भोजन कराने से कुंडली की परेशानियों का प्रभाव कम होता है और जीवन में सहजता आती है।
पवित्र नदियों में स्नान करने से नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और शरीर में नई शक्ति आती है। दान करते समय मन में केवल सेवा का भाव रखें, क्योंकि पवित्र मन से किया गया समर्पण ही ईश्वर स्वीकार करते हैं और इससे उन्नति के मार्ग खुलते हैं।
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वाणी और व्यवहार पर नियंत्रण: इस समय मन संवेदनशील रहता है, इसलिए अपनी बातचीत में संयम और सहजता बनाए रखें।
विवादों से दूरी: किसी भी प्रकार के वाद-विवाद से बचें ताकि घर और मन का वातावरण कलह मुक्त बना रहे।
मधुर भाषा का प्रयोग: कड़वे शब्दों के इस्तेमाल से बचें और दूसरों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार करें, जिससे मानसिक तनाव न बढ़े।
सात्विक जीवनशैली: खान-पान में पूरी सात्विकता अपनाएं और तामसिक वस्तुओं से दूर रहें ताकि शारीरिक संतुलन बना रहे।
आध्यात्मिक अभ्यास: दीपक जलाकर ईश्वर का ध्यान करें और मंत्रों का जाप करें, जिससे मन शांत और एकाग्र रहे।
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लेखक: दिव्या गौतम, Astropatri.com अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए [email protected] पर संपर्क करें।
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