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    क्या आप भी चाहते हैं पितृ दोष से मुक्ति, तो वैशाख अमावस्या के दिन ऐसे करें पितरों का तर्पण

    Updated: Sat, 11 Apr 2026 02:00 PM (IST)

    वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख अमावस्या 17 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन पितरों का तर्पण और पिंडदान करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है। ...और पढ़ें

    पितृ तर्पण की सरल विधि (Image Source: AI-Generated)

    पितृ तर्पण की सरल विधि (Image Source: AI-Generated) 

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर महीने में अमावस्या मनाई जाती है। इस दिन पितरों का तर्पण, पिंडदान और पवित्र नदियों में स्नान, दान करने का विशेष महत्व है। वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह की अमावस्या को वैशाख अमावस्या के नाम से जाना जाता है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन पितरों का तर्पण और पिंडदान करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही पितृ दोष दूर होता है। आइए आपको बताते हैं कि वैशाख अमावस्या पर कैसे करें पूर्वजों का तर्पण।

    वैशाख अमावस्या 2026 कब है? (Vaishakh Amavasya 2026 Date and Shubh Muhurat)

    वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार 17 अप्रैल को वैशाख अमावस्या मनाई जाएगी।
    वैशाख अमावस्या की तिथि की शुरुआत- 16 अप्रैल को रात में 08 बजकर 11 मिनट पर
    वैशाख अमावस्या की तिथि का समापन- 17 अप्रैल को शाम को 05 बजकर 21 मिनट पर

    ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 25 मिनट से 04 बजकर 09 मिनट तक
    विजय मुहूर्त- दोपहर 02 बजकर 30 मिनट से 03 बजकर 21 मिनट तक
    गोधूलि मुहूर्त - शाम 06 बजकर 47 मिनट से 07 बजकर 09 मिनट तक
    निशिता मुहूर्त - रात 11 बजकर 58 मिनट से 12 बजकर 42 मिनट तक

    Vaishakh Amavasya 2026 (1)

      (Image Source: AI-Generated) 

    पितृ तर्पण विधि (Pitru Tarpan Vidhi)

    • अमावस्या के दिन सुबह स्नान करने के बाद साफ कपड़े धारण करें।
    • लोटा में शुद्ध जल, गंगाजल, कच्चा दूध और काले तिल मिला लें।
    • दक्षिण दिशा की तरफ मुंह करके जल को अंगूठे और तर्जनी उंगली के बीच के हिस्से से पितरों को अर्पित करें।
    • पितरों का ध्यान करें।
    • इसके अलावा ॐ पितृभ्य: नम:" या "ॐ सर्व पितृ देवाय नम: मंत्र का जप कर सकते हैं।
    • इसके बाद हाथ जोड़कर पितरों से प्रार्थना करें कि अगर कोई जाने-अनजाने में गलती हुई हो, तो मुझे क्षमा करें।
    • तर्पण करने के बाद मंदिर या गरीब लोगों में विशेष चीजों का दान जरूर करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि दान करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है और व्यक्ति को जीवन में सभी सुख मिलते हैं।

    करें इन चीजों का दान

    अमावस्या के दिन पूजा-अर्चना करने के बाद अपनी श्रद्धा अनुसार अन्न, वस्त्र, साबुत उड़द दाल और कंबल का दान करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन चीजों का दान करने से व्यक्ति पर पूर्वजों की कृपा बरसती है और जीवन में आ रहे दुख दूर होते हैं। साथ ही शुभ फल की प्राप्ति होती है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।