शुक्रवार को मां वैभव लक्ष्मी की पूजा में न करें ये गलतियां, इन नियमों के पालन से मिलेगी सुख-समृद्धि
शुक्रवार को मां वैभव लक्ष्मी की पूजा करते समय किन गलतियों से बचना चाहिए? आइए जानते हैं। ...और पढ़ें

मां वैभव लक्ष्मी की पूजा में अपनाएं ये खास नियम। (Ai Generated Image)
HighLights
शुक्रवार का दिन बेहद शुभ माना जाता है
यह दिन मां वैभव लक्ष्मी को समर्पित है
इस दिन किसी के बारे में बुरा बोलने से बचना चाहिए
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में शुक्रवार का दिन धन की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित है। इस दिन मां लक्ष्मी के वैभव लक्ष्मी स्वरूप की पूजा का विधान है। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त पूरी श्रद्धा और सही नियमों के साथ यह व्रत रखता है, उसकी दरिद्रता दूर होती है और घर में सुख-शांति का वास होता है। हालांकि, वैभव लक्ष्मी का व्रत जितना फलदायी है, इसके नियम उतने ही कठिन हैं। पूजा के दौरान की गई एक छोटी सी गलती व्रत के पुण्य फल को खत्म कर सकती है। ऐसे में आइए इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं, जो इस प्रकार हैं।

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पूजा में भूलकर भी न करें ये गलतियां
- अक्सर लोग बिना किसी निश्चित संख्या के व्रत शुरू कर देते हैं। वैभव लक्ष्मी व्रत हमेशा 11 या 21 शुक्रवार के संकल्प के साथ शुरू करना चाहिए। संकल्प पूरा होने पर उद्यापन करना जरूरी है।
- मां वैभव लक्ष्मी की पूजा तब तक अधूरी मानी जाती है, जब तक श्री यंत्र की पूजा न की जाए। कई लोग केवल तस्वीर के सामने दीपक जला देते हैं, जबकि शास्त्र कहते हैं कि वैभव लक्ष्मी के साथ श्री यंत्र और मां लक्ष्मी के आठ स्वरूपों का ध्यान करना जरूरी है।
- शुक्रवार के दिन घर में लहसुन, प्याज या मांसाहार का प्रयोग बिल्कुल न करें। इसके अलावा, इस दिन किसी की बुराई करना, घर में कलह करना भी अशुभ माना जाता है।
इन नियमों के पालन से चमकेगी किस्मत
1. सोने या चांदी का सिक्का
पूजा के समय एक तांबे के लोटे में जल भरकर उस पर एक कटोरी रखें। उस कटोरी में सोने या चांदी का कोई आभूषण या सिक्का रखें। अगर संभव न हो, तो एक रुपए का सिक्का भी रख सकते हैं। इसे मां लक्ष्मी का रूप मानकर विधिवत पूजा करें।
2. खीर का भोग
मां वैभव लक्ष्मी को सफेद रंग की चीजें प्रिय हैं। इसलिए पूजा में गाय के दूध की बनी खीर का भोग जरूर लगाएं। पूजा के बाद इस प्रसाद को सबसे पहले परिवार के सदस्यों में बांटें और फिर ग्रहण करें।
3. गोधूलि बेला में पूजन
वैभव लक्ष्मी की पूजा के लिए शाम का समय सबसे शुभ माना जाता है। लाल रंग के वस्त्र धारण कर मां की आरती करें और 'लक्ष्मी चालीसा' का पाठ करें।
4. सुहागिनों को दान
संकल्प पूरा होने पर उद्यापन के दिन कम से कम 7 या 11 सुहागिन महिलाओं को 'वैभव लक्ष्मी व्रत कथा' की पुस्तकें और सुहाग की सामग्री भेंट करें। इससे मां बहुत खुश होती हैं।
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