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तनाव और जीवन के कष्ट दूर करता है कृष्ण मूल मंत्र, रोज सुबह 108 बार करें ‘ॐ कृष्णाय वासुदेवाय का जाप’

Published: Fri, 19 Jun 2026 07:19 PM (IST)

हिंदू धर्म में कृष्ण मूल मंत्र, "ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः", तनाव और जीवन के ...और पढ़ें

तनाव दूर कर जीवन में लाएं शांति और सकारात्मकता (Picture Credit- AI Generated)

तनाव दूर कर जीवन में लाएं शांति और सकारात्मकता (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के दौरान अक्सर मंत्रों का इस्तेमाल किया जाता है। ये मंत्र और श्लोक अपने अंदर एक अलग उर्जा और शक्ति लिए रहते हैं। सनातन धर्म में बोले जा रहे मंत्रों का अपना अलग महत्व और अर्थ होता है। 

हमारे यहां बचपन से ही कई सारे मंत्रों के बारे में बताया और समझाया जाता है। ऐसा ही एक मंत्र शक्तिशाली मंत्र भगवान कृष्ण का है, जो दुनियाभर न सिर्फ मंदिरों गूंजता है, बल्कि करोड़ों भक्तों के लिए एक सुरक्षाकचव की तरह काम करता है। 

“ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने

प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः”

भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित इस मंत्र को हिंदू धर्म में 'कृष्ण मूल मंत्र' या 'कृष्ण अष्टाक्षर मंत्र' के नाम से जाना जाता है। अगर आप इस मंत्र को कोई आम मंत्र मानते हैं, तो अपने इस विचार को तुरंत बदल लें। यह सिर्फ चंद शब्द नहीं, बल्कि भगवान कृष्ण को अपनी आत्मा से पुकारने का एक बेहद गहरा और पवित्र तरीका है। आइए, बहुत ही सरल भाषा में समझते हैं कि इस श्रीकृष्ण के इस मूल मंत्र का असल अर्थ और आध्यात्मिक लाभ- 

मंत्र का शाब्दिक अर्थ

अगर इसे आसान शब्दों में समझें, तो इस मंत्र का मतलब है:

"मैं भगवान कृष्ण को बार-बार प्रणाम करता/करती हूं, जो वासुदेव के पुत्र हैं, जो स्वयं परमात्मा हैं, जो अपने भक्तों के सारे दुखों और कष्टों को हर लेते हैं, और जिन्हें हम प्रेम से गोविंद कहते हैं।"

कई नाम से पुकारे गए श्रीकृष्ण

इस एक श्लोक में भगवान कृष्ण को कई प्यारे और शक्तिशाली नामों को पुकारा गया है। 'कृष्णाय' यानी जो सबको अपनी ओर खींच लें, 'वासुदेवाय' यानी वासुदेव के पुत्र, 'हरये'  अर्थात हमारे सारे दुख और परेशानियां हरने वाले, 'परमात्मने' मतलब परम ईश्वर और 'गोविंदाय' यानी गायों और हमारी इंद्रियों के रक्षक। इस एक मंत्र के जप से ही व्यक्ति ईश्वर से मानसिक शांति, जीवन में सही राह और भगवान का आशीर्वाद मांगता है।

क्या है मंत्र के आध्यात्मिक 

यह मंत्र जीवन में कई चमत्कारी बदलाव ला सकता है:

  • यह मंत्र हमारे अंदर के घमंड को खत्म करता है और जिंदगी में आने वाली रुकावटों को पार करने की हिम्मत देता है।
  • इसे सच्चे मन से पढ़ने पर व्यवहार में एक अलग-सी विनम्रता, दया और ईश्वर के प्रति निस्वार्थ प्रेम जागता है।
  • आजकल की भागदौड़ में हमारा मन बहुत जल्दी भटक जाता है। ऐसे में इस मंत्र का नियमित जाप दिमाग को शांत करता है, जिससे हमें सही और गलत के बीच फर्क करने की समझ मिलती है।

कब करें मंत्र का जाप?

  • सूरज निकलने के समय अगर आप तुलसी या रुद्राक्ष की माला से 108 बार इसका जाप करते हैं, तो आपका पूरा दिन पॉजिटिविटी और शांति से भरा रहेगा।
  • जब भी आपको बहुत ज्यादा तनाव, गुस्सा या बेचैनी महसूस हो, तो कुछ पल के लिए आंखें बंद करें और बस इस मंत्र का मन ही मन उच्चारण करें। इससे आपकी आपकी धड़कनें और विचार शांत होंगे।
  • घर में होने वाली रोज की पूजा, आरती या ध्यान के समय इसे शामिल करने से घर का माहौल बेहद पवित्र हो जाता है।

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