पितृ पक्ष में काले तिल का इस्तेमाल करना क्यों माना जाता है सबसे ज्यादा शुभ?
पितृ पक्ष में काले तिल का दान और तर्पण में उपयोग अत्यंत शुभ माना जाता है। यह पूर्वजों की आत्मा ...और पढ़ें

पितृ पक्ष में काले तिल का महत्व और इसके चमत्कारी लाभ (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
काले तिल पूर्वजों की आत्मा को शांति प्रदान करते हैं।
इनके दान से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
काले तिल नकारात्मक ऊर्जा दूर कर सुरक्षा कवच बनाते हैं।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर साल पितृ पक्ष की शुरूआत भाद्रपद महीने में होती है और पूरे सोलह दिनों का समय पूर्वजों को समर्पित होता है। इस दौरान पूर्वजों के लिए पिंड दान किया जाता है और उनके नाम से जल तर्पण किया जाता है। यही नहीं इस दौरान कुछ चीजों का दान करने से पूर्वजों की कृपा दृष्टि बनी रहती है।
ऐसा कहा जाता है कि इस अवधि में जो व्यक्ति काले तिल का दान करता है उसे सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है और उनके ऊपर पूर्वजों की कृपा दृष्टि बनी रहती है।
काले तिल का दान करना और जल में काले तिल डालकर पूर्वजों के निमित्त तर्पण करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। आइए आपको बताते हैं श्राद्ध में काले तिल के दान से लेकर इसका अन्य कामों में इस्तेमाल करने के फायदों के बारे में।
श्राद्ध पक्ष में काले तिल का महत्व
श्राद्ध यानी पितृ पक्ष में पिंड दान और तर्पण खास होता है, वहीं काले तिल का विशेष महत्व होता है। इन्हें जल तर्पण में इस्तेमाल किया जाता है, पिंडों में मिलाया जाता है, पवित्र नदी में अर्पित किया जाता है और मुख्य रूप से जरूरतमंदों को दान के रूप में दिया जाता है। यह एक ऐसी परंपरा है जो दैवीय मूल, शुद्ध करने वाले शक्तिशाली गुणों और हमारे पूर्वजों को संतुष्टि देने की क्षमता से जुड़ी है।
पूर्वजों से जुड़ी इन रस्मों में काले तिल का सदियों से इस्तेमाल होता आया है। पद्म पुराण के अनुसार भगवान विष्णु के वराह अवतार के समय उनके शरीर के रोमों से 'दर्भा' घास उत्पन्न हुई थी, वहीं काले तिल उनकी उस दिव्य ऊर्जा या गहरे ध्यान के क्षणों में निकले पसीने से उत्पन्न हुए हैं।
विष्णु जी के शरीर से उत्पन्न होने की वजह से तिल को एक पवित्र सामग्री माना जाता है और इसका उपयोग पूजा से लेकर पूर्वजों की शांति के लिए भी होता है।
काले तिल को माना जाता है पवित्र सामग्री
हिंदू धर्म में काले तिल को एक पवित्र सामग्री माना जाता है। पितृ पक्ष में तिल का इस्तेमाल करने से पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है और उनकी आत्मा को शांति मिलती है। काले तिल किसी भी तरह की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने में मदद करते हैं। इसी वजह से तर्पण के समय जल में काले तिल मिलाए जाते हैं और पूर्वजों का नाम लेते हुए वही जल अर्पित किया जाता है।
काले तिल एक कवच की तरह काम करते हैं
काले तिल सभी बाधाओं को दूर रखते हैं और अग्नि पुराण में भी इसके महत्व को बताया गया है। गरुड़ पुराण में बताया गया है कि काले तिल मृतक द्वारा किए गए पापों को समाप्त करते हैं और उनके वंशजों के लिए एक सुरक्षा का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। श्राद्ध के दौरान हम जो चीजें पूर्वजों को अर्पित करते हैं, उनका उद्देश्य पूर्वजों की आगे की यात्रा में मदद करना और उन्हें कर्मों के बोझ से मुक्त करना भी होता है।
पितृ पक्ष में तिल का दान क्यों शुभ माना जाता है?
ऐसा कहा जाता है कि यदि कोई व्यक्ति पितृ पक्ष के दौरान किसी जरूरतमंद को काले तिल का दान करता है तो उसे पितृ दोषों से मुक्ति मिलती है। यही नहीं इससे पूर्वजों का आशीर्वाद भी बना रहता है और वंशजों के घर में सुख-समृद्धि आती है।
पितृ पक्ष में काले तिल का इस्तेमाल अत्यंत शुभ माना जाता है और इसे मुख्य सामग्री की तरह तर्पण से लेकर दान तक में प्रयोग किया जाता है।
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