सावधान! सितंबर महीने में 2 बार लग रहा है अशुभ 'पंचक', भूलकर भी न करें ये 5 काम
पंचक पांच दिनों का अशुभ समय होता है, जब चंद्रमा कुछ विशेष नक्षत्रों से गुजरता है। सितंबर 2026 में दो ...और पढ़ें

सितंबर महीने में कब लगेगा पंचक?

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू परंपरा में किसी भी काम में सफलता और शुभ परिणाम हासिल करने के लिए शुभ-अशुभ मुहूर्त का खास ध्यान दिया जाता है। अक्सर लोग किसी भी शुभ कार्यों को करने से पहले पंचांग देखना पसंद करते हैं। पंचांग में अशुभ दिनों और मुहूर्त में कार्य करने से बचा जाता है, उसमें पंचक भी शामिल है।
पंचक से अभिप्राय पांच दिनों का अशुभ समय जब चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र से होकर गुजरता है। पंचक का असर इसके शुरुआती दिनों से आंका जाता है। जैसे रविवार के दिन शुरू होने वाले पंचक को रोग पंचक कहा जाता है, जबकि सोमवार को शुरु हुए पंचक का नाम राज पंचक होता है। आइए जानते हैं इस साल सितंबर महीने में कब और किस दिन पंचक लगने जा रहा है?
सितंबर 2026 में पंचक से जुड़ी तारीखें?
हिंदू पंचांग के मुताबिक, इस साल सितंबर महीने में 2 बार पंचक लग रहा है। जिसमें पहला पंचक 27 अगस्त से शुरू होकर 1 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। जबकि सितंबर महीने का दूसरा पंचक 23 सितंबर 2026 से शुरू होकर 28 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा।
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, बुधवार या गुरुवार से शुरू होने वाले पंचक उपयुक्त (रोग, राज, अग्नि, चोर और मृत्यु) इनमें से किसी में नहीं आते हैं। इसे सामान्य पंचक भी कहा जाता है, क्योंकि इस पर किसी वार या दोष का नाम नहीं पड़ता है।
पंचक में किन कामों को करने से बचना चाहिए?
ज्योतिष शास्त्र में पंचक को काफी अशुभ समय माना जाता है, जिसे कुछ ऐसे कार्यों को करने की मनाही होती है, जिन्हें शुभ मुहूर्त में ही किया जाता है।
पंचक के दौरान भूलकर भी घर में लकड़ी और इससे बने सामान, घास आदि खरीदना दोष माना जाता है।
इसके अलावा पंचक में चारपाई को बुनना या फिर उसे खोलना या फिर से बांधना भी नहीं चाहिए।
पंचक के दौरान छत डलवाने का कार्य भी नहीं किया जाता है।
इस दौरान दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करना अशुभ माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक अशुभ काल में दक्षिण दिशा की ओर यात्रा इसलिए करने से बचना चाहिए क्योंकि यह दिशा यम से जुड़ी मानी जाती है।
पंचक के दौरान अगर किसी की मृत्यु हो जाए तो उसका अंतिम संस्कार सामान्य से करने के बजाय पंचक शांति के साथ करना चाहिए। पंचक शांति के लिए पांच पुतले बनाकर उसका अंतिम संस्कार किया जाता है।
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