विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

सावधान! सितंबर महीने में 2 बार लग रहा है अशुभ 'पंचक', भूलकर भी न करें ये 5 काम

Published: Sat, 29 Aug 2026 10:00 AM (IST)Updated: Tue, 08 Sep 2026 11:52 AM (IST)

पंचक पांच दिनों का अशुभ समय होता है, जब चंद्रमा कुछ विशेष नक्षत्रों से गुजरता है। सितंबर 2026 में दो ...और पढ़ें

सितंबर महीने में कब लगेगा पंचक?

सितंबर महीने में कब लगेगा पंचक?

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू परंपरा में किसी भी काम में सफलता और शुभ परिणाम हासिल करने के लिए शुभ-अशुभ मुहूर्त का खास ध्यान दिया जाता है। अक्सर लोग किसी भी शुभ कार्यों को करने से पहले पंचांग देखना पसंद करते हैं। पंचांग में अशुभ दिनों और मुहूर्त में कार्य करने से बचा जाता है, उसमें पंचक भी शामिल है।

पंचक से अभिप्राय पांच दिनों का अशुभ समय जब चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र से होकर गुजरता है। पंचक का असर इसके शुरुआती दिनों से आंका जाता है। जैसे रविवार के दिन शुरू होने वाले पंचक को रोग पंचक कहा जाता है, जबकि सोमवार को शुरु हुए पंचक का नाम राज पंचक होता है। आइए जानते हैं इस साल सितंबर महीने में कब और किस दिन पंचक लगने जा रहा है?

सितंबर 2026 में पंचक से जुड़ी तारीखें?

हिंदू पंचांग के मुताबिक, इस साल सितंबर महीने में 2 बार पंचक लग रहा है। जिसमें पहला पंचक 27 अगस्त से शुरू होकर 1 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। जबकि सितंबर महीने का दूसरा पंचक 23 सितंबर 2026 से शुरू होकर 28 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा।

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, बुधवार या गुरुवार से शुरू होने वाले पंचक उपयुक्त (रोग, राज, अग्नि, चोर और मृत्यु) इनमें से किसी में नहीं आते हैं। इसे सामान्य पंचक भी कहा जाता है, क्योंकि इस पर किसी वार या दोष का नाम नहीं पड़ता है।

पंचक में किन कामों को करने से बचना चाहिए?

ज्योतिष शास्त्र में पंचक को काफी अशुभ समय माना जाता है, जिसे कुछ ऐसे कार्यों को करने की मनाही होती है, जिन्हें शुभ मुहूर्त में ही किया जाता है।

पंचक के दौरान भूलकर भी घर में लकड़ी और इससे बने सामान, घास आदि खरीदना दोष माना जाता है।

इसके अलावा पंचक में चारपाई को बुनना या फिर उसे खोलना या फिर से बांधना भी नहीं चाहिए।

पंचक के दौरान छत डलवाने का कार्य भी नहीं किया जाता है।

इस दौरान दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करना अशुभ माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक अशुभ काल में दक्षिण दिशा की ओर यात्रा इसलिए करने से बचना चाहिए क्योंकि यह दिशा यम से जुड़ी मानी जाती है।

पंचक के दौरान अगर किसी की मृत्यु हो जाए तो उसका अंतिम संस्कार सामान्य से करने के बजाय पंचक शांति के साथ करना चाहिए। पंचक शांति के लिए पांच पुतले बनाकर उसका अंतिम संस्कार किया जाता है।

यह भी पढ़ें- भाद्रपद मास 2026 कब से कब तक? जानें शुरुआत, समापन की सटीक तिथि और इस माह का महत्व

यह भी पढ़ें- आज से शुरू हुआ भाद्रपद का महीना, ये गलतियां जीवन भर रुलाएंगी, तुरंत पढ़ें नियम और दान

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।