क्या आप भी करा रहे हैं सत्यनारायण कथा? पूर्ण फल के लिए अभी जान लें दिशा, भोग और पूजा के अहम नियम
भगवान सत्यनारायण की कथा जीवन में सुख और प्रभु की कृपा दिलाती है। इसके पूर्ण फल के लिए शुभ दिन, दिशा, भोग और पूजा के नियमों का पालन आवश्यक है।

किस दिन कराएं सत्यनारायण कथा? (Picture Credits- AI Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में भगवान सत्यनारायण की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। भगवान सत्यनारायण की साधना को स्कंद पुराण के रेवा खंड में अत्यधिक फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान सत्यनारायण की कथा करवाने से साधक को जीवन में सभी सुख मिलते हैं और उन पर प्रभु की विशेष कृपा बनी रहती है।
इस पूजा के लिए प्रदोष काल का समय अधिक शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि भगवान सत्यनारायण की कथा का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है, जब इसे विधिपूर्वक किया जाए। अगर आप भी भगवान सत्यनारायण की कथा करवाना चाहते हैं, तो ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको विस्तार से बताते हैं इससे जुड़े नियम के बारे में।
कथा के लिए शुभ दिन
भगवान सत्यनारायण की कथा पूर्णिमा, एकादशी या किसी अन्य शुभ तिथि पर करवाना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
दिशा का रखें विशेष ध्यान
वास्तु शास्त्र के अनुसार, भगवान सत्यनारायण की कथा सुनते समय आपका मुख पूर्व दिशा की तरफ होना चाहिए। भगवान की चौकी पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है।
कथा से पहले ये करें ये काम
कथा से पहले पूरे घर की अच्छी तरह सफाई करें और गंगाजल छिड़क कर उसे शुद्ध करें। घर के मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों का तोरण अवश्य बांधें। ऐसी मान्यता है कि जिस घर में पवित्रता का ध्यान रखा जाता है, वहां धन की देवी मां लक्ष्मी वास करती हैं।
किन चीजों का लगाएं भोग
भगवान सत्यनारायण को पंजीरी, पंचामृत, फल और मिठाई आदि का भोग लगाएं। ध्यान रहे कि भोग में तुलसी के पत्ते जरूर शामिल करें, इसके बिना भोग पूर्ण नहीं माना जाता।
कथा के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
- सुबह स्नान करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें।
- इसके बाद चौकी पर पीला या लाल रंग का कपड़ा बिछाकर भगवान सत्यनारायण की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- हाथ में जल, फूल व अक्षत लेकर पूजा का संकल्प लें।
- देसी घी का दीपक जलाएं।
- पूर्ण श्रद्धा और सच्चे मन से भगवान सत्यनारायण की कथा सुनें।
- इस दौरान किसी के बारे में गलत विचार मन में न लाएं और किसी से वाद-विवाद न करें।
- कथा के समय अपना पूरा ध्यान प्रभु के चरणों में केंद्रित रखें।
- कथा समाप्त होने के बाद विधिपूर्वक आरती करें।
- मंत्रों का जप करें और भगवान को उनकी प्रिय चीजों का भोग लगाएं।
- अंत में सभी श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरण करें और पंडित जी को दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।
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