महादेव को प्रसन्न करने के लिए रावण करता था इस एक मंत्र का जाप, जिसका अर्थ हर शिव भक्त को जानना चाहिए!
लंकापति रावण अपनी अदम्य शक्ति और ज्ञान के साथ-साथ महादेव के परम भक्त भी थे। वे प्रतिदिन 'शिव अपराध क्षमापन ...और पढ़ें

भगवान शिव को प्रसन्न करने लिए रावण रोज करता था इस मंत्र का जाप

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। दशानन लंकापति रावन अपने अदम्य शक्ति के साथ-साथ प्रकांड ज्ञान के लिए भी जाना जाता था। कहा जाता है कि, जब रावण किसी मंत्र का उच्चारण करता था, तो तीनों लोकों में खौफ की लहर दौड़ जाती थी। लेकिन जब बात महादेव की आती थी, तो तीनों लोकों को वश में करने वाला रावण महादेव के आगे शीश झुकाता था।
रावण सिर्फ एक क्रूर राक्षस राजा नहीं था, बल्कि चारों वेदों का ज्ञाता, 6 शास्त्रों का जानकार, एक विद्वान पंडित और शिवजी के परम भक्तों में से एक था। महादेव के साथ रावण का रिश्ता बाकी दुनिया के साथ उसके रिश्ते से बिल्कुल अलग था। जहां अन्य दुनिया के सामने उसका अहंकार बेहिसाब था, वहीं भगवान शिव जी के सामने रावण पूरी तरह से खुद को समर्पित कर देता था।
रावण का अचूक शिव मंत्र
भगवान शिव के सामने समर्पण की इस भावना की सबसे सुंदर अभिव्यक्ति 'शिव अपराध क्षमापन स्तोत्र' में देखने को मिलती है। क्या है यह स्तोत्र जिसे रावण महादेव की पूजा के दौरान रोजाना जाप करता था।
श्लोक
करचरणकृतं वाक्कायजं कर्मजं वा
श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधम् ।
विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व
शिव शिव करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो ॥
इसका अर्थ है कि, 'हे शिव', हे करुणा के सागर, हे महादेव शंभो! मैंने अपने हाथों-पैरों, वाणी-शरीर, कानों-आंखों या मन से जाने-अनजाने में जो भी अपराध किए हों, उन सभी के लिए मुझे माफ करें।
असल मायने में शिव भक्ति का यही सर्वोच्च भाव है। महादेव से कुछ मांगना नहीं चाहिए, बल्कि अपने किए गए सभी कामों, शब्दों, विचारों, गलतियों और इरादों को उनके चरणों में समर्पित कर देना चाहिए।

शिव का यह मंत्र क्या शिक्षा देता है?
यह मंत्र हमें भगवान शिव के आगे हमें रोज पढ़ना चाहिए। जिससे अनजाने में किए गए हमारे गलत कामों की माफी हमें मिल सकें। पौराणिक कथाएं बताती हैं कि, जब रावण ने मां सीता का हरण किया था, तब उसके सिर से महादेव का हाथ हट गया था, क्योंकि हिंदू सनातन धर्म में मुख्य शिक्षा में से एक है, अगर आप अच्छे इंसान नहीं हैं, तो आप आध्यात्मिक नहीं बन सकते हैं। इसीलिए ध्यान रहे कि, धर्म का मार्ग आपसे कभी नहीं छूटे।
यह भी पढ़ें- राम सेतु बनाने के लिए नल और नील ही क्यों थे सक्षम? वाल्मीकि रामायण में छिपा है रहस्य
यह भी पढ़ें- सावन विशेष: शिव पूजा में भूलकर भी न करें 10 गलतियां, वरना नहीं मिलेगा पूजा का फल!
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
