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    किन लोगों को पहनना चाहिए पुखराज? जानें इसके चमत्कारी फायदे और धारण करने की सही विधि

    Updated: Tue, 11 Aug 2026 11:35 AM (IST)

    वैदिक ज्योतिष में पुखराज को देवगुरु बृहस्पति का रत्न माना गया है। जानिए पुखराज पहनने के क्या फायदे हैं, किसे इसे पहनना चाहिए और इसे धारण करने की सही व ...और पढ़ें

    पुखराज पहनने के फायदे और नुकसान (AI-Generated Image)

    पुखराज पहनने के फायदे और नुकसान (AI-Generated Image)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। रत्न शास्त्र में हर ग्रह की शांति और शुभता बढ़ाने के लिए अलग-अलग रत्नों के बारे में बताया गया है। इन्हीं में से एक बेहद खूबसूरत और प्रभावशाली रत्न है 'पुखराज' (Yellow Sapphire)। वैदिक ज्योतिष में पुखराज को देवगुरु बृहस्पति का रत्न माना गया है। ऐसा माना जाता है कि जिन लोगों की कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर है या जिन्हें गुरु के शुभ फलों की जरूरत है, उनके लिए पुखराज धारण करना बहुत लाभकारी होता है। यह रत्न ज्ञान, धन, विवाह, संतान और मान-सम्मान में वृद्धि करने वाला माना गया है।

    किन राशियों के लिए शुभ है पुखराज?

    ज्योतिष के जानकारों का मानना है कि धनु और मीन राशि के स्वामी खुद देवगुरु बृहस्पति हैं, इसलिए इन दो राशियों के लोगों के लिए पुखराज पहनना सबसे ज्यादा लकी होता है। इसके अलावा, कुंडली की कुछ खास स्थितियों को देखते हुए मेष, कर्क और वृश्चिक राशि के लोगों को भी इसे पहनने की सलाह दी जाती है। लेकिन एक बात हमेशा याद रखें—कोई भी रत्न बिना किसी योग्य ज्योतिषी को अपनी कुंडली दिखाए नहीं पहनना चाहिए।

    पुखराज पहनने के बड़े फायदे

    पुखराज पहनने से जिंदगी में कई तरह के सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं। अगर आपको नौकरी या बिजनेस में मनचाही तरक्की नहीं मिल रही है, तो यह रत्न नए अवसर दिलाने में मदद कर सकता है। इससे पैसों की तंगी दूर होती है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।

    जिन लोगों की शादी में बेवजह की देरी हो रही है, उनके लिए पुखराज पहनना काफी फायदेमंद माना जाता है। इसके साथ ही, यह छात्रों का पढ़ाई में फोकस बढ़ाता है, प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाता है और मन को शांत रखकर आपका कॉन्फिडेंस बढ़ाता है।

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    पुखराज धारण करने का सही तरीका

    पुखराज को हमेशा गुरुवार के दिन सुबह सूर्योदय के बाद ही पहनना चाहिए। इसे सोने (Gold) की अंगूठी या पेंडेंट में बनवाना सबसे अच्छा माना जाता है।

    पहनने से पहले अंगूठी को कच्चे दूध, गंगाजल और सादे पानी से अच्छी तरह धोकर शुद्ध कर लें। उस दिन कोशिश करें कि पीले रंग के कपड़े पहनें। भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की पूजा करें और गुरु के मंत्र “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” का कम से कम 108 बार (एक माला) जाप करें। इसके बाद पूरी श्रद्धा के साथ इसे अपने दाहिने हाथ (Right hand) की तर्जनी (पहली उंगली) में पहन लें।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।