क्या पितृ पक्ष में बाल और नाखून काटना पाप है? दूर करें अपना हर कंफ्यूजन
पितृ पक्ष के दौरान बाल, दाढ़ी और नाखून काटने को लेकर अक्सर भ्रम रहता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ ...और पढ़ें

पितृ पक्ष में श्राद्ध के दिन बाल दाढ़ी और नाखून काटने के धार्मिक नियम (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
पितृ पक्ष में बाल, दाढ़ी, नाखून काटने से बचें।
श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को विशेष रूप से पालन करना चाहिए।
मनुस्मृति के अनुसार क्षौर कर्म अनुष्ठानों में वर्जित है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में 16 दिनों तक चलने वाले पितृ पक्ष का अधिक महत्व है। यह पूरी अवधि हमारे पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और सम्मान प्रकट करने के लिए समर्पित होती है। इस दौरान लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति और उनकी तृप्ति के लिए तर्पण तथा श्राद्ध कर्म करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूर्वजों का श्राद्ध उसी तिथि पर करना सबसे उत्तम माना जाता है जिस दिन उनका देहांत हुआ हो। इससे विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। पितृ पक्ष में कई नियमों का पालन किया जाता है जिससे पूर्वजो प्रसन्न होते हैं और धरती से वापस अपने वंशजो के हाथों तृप्त होकर जाते हैं।
पितृ पक्ष के नियमों में से एक हैं इस अवधि में बाल या दाढ़ी न कटवाना और नाखून न काटना। आप आपको बताते हैं क्या इस दौरान मुख्य रूप से श्राद्ध की मुख्य तिथि के दिन आपको बाल या दाढ़ी कटवानी चाहिए या नहीं?
पितृ पक्ष कब से कब तक है?
इस साल पितृ पक्ष का आरंभ 26 सितंबर से हुआ है और इसका समापन 14 अक्टूबर यानी सर्वपितृ अमावस्या से होगा। पितृ पक्ष की पूरी अवधि में पितरों के लिए पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म को प्रमुख माना जाता है और इस दौरान ब्राह्मण भोज का भी विशेष महत्व होता है। इस पूरी अवधि में लोग पूर्वजों के लिए कई कर्म करते हैं और उनकी आत्मा की शांति के उपाय आजमाते हैं।
क्या पितृ पक्ष में बाल, नाखून या दाढ़ी कटवानी चाहिए?
वैसे तो पितृ पक्ष के पूरे 15 या 16 दिनों में आपको इसके नियमों के अनुसार बाल नहीं कटवाने चाहिए और दाढ़ी बनाने या नाखून काटने से बचना चाहिए। वैसे तो यह नियम उन सभी के लिए लागू होता है जिनके घर में कोई भी पूर्वजों के लिए तर्पण या श्राद्ध किया जाता है, लेकिन आपको मुख्य रूप से श्राद्ध की तिथि वाले दिन इन चीजों से परहेज करना चाहिए।
वैसे यह नियम मुख्य रूप से उस व्यक्ति पर लागू होता है जो किसी भी पूर्वज के लिए तर्पण या पिंड दान करता है। जो भी इस दौरान पूर्वजों की पूजा के विपरीत कर्म करता है उसे पितरों का आशीर्वाद नहीं मिलता है, बल्कि वो नाराज होकर धरती से चले जाते हैं।
मुख्य रूप से किसे नहीं कटवाने चाहिए बाल और ढाढ़ी?
मनुस्मृति के अनुसार, जब कोई व्यक्ति किसी भी अनुष्ठान या व्रत में बैठता है, तब उसके लिए 'क्षौर कर्म 'यानी कि शरीर के अतिरिक्त बालों को काटना, दाढ़ी-मूंछ साफ करना या नाखून काटना जैसे कामों को न करने की सलाह दी जाती है। पितृ पक्ष को भी 16 दिनों का एक अनुष्ठान माना गया है जो पूर्वजों को समर्पित है, इसलिए इस दौरान इन कामों से बचना ही बेहतर है।
जो व्यक्ति पितृ कर्म करता है यानी श्राद्ध पक्ष में हर रोज तर्पण करता है उसे बाल, दाढ़ी-मूंछ या नाखून काटने से परहेज करना चाहिए। हालांकि, अन्य लोग किसी विशेष परिस्थिति में नाखून काट सकते हैं, वहीं बालों को काटने से बचना चाहिए। यही नहीं आपको इस दौरान श्रृंगार या साज-सज्जा की चीजों से भी बचना चाहिए, क्योंकि यह पूरा समय पूर्वजों को समर्पित होता है।
आपको इस दौरान अपना ध्यान पूरी तरह से पूर्वजों पर ही केंद्रित करना चाहिए जिससे उनका आशीर्वाद मिले। ऐसे में यदि आप पितृ पक्ष के आरंभ होने ये पहले यानी पूर्णिमा तिथि को ही ये कार्य कर लें तो बेहतर होगा।
पितृ पक्ष का समय पितृ ऋण चुकाने के लिए खास माना जाता है, इसलिए वंशजों को इन दौरान सभी कर्म पूर्वजों की शांति के लिए ही करने चाहिए।
पितृ पक्ष के दौरान आपको बाल और दाढ़ी काटने के अलावा भी कई नियमों का पालन करना चाहिए, जिससे पूर्वजों की कृपा बनी रहे।
यह भी पढ़ें- पितृ पक्ष में भूलकर भी न करें ये 7 गलतियां, नाराज पितरों को मनाना हो जाएगा मुश्किल
यह भी पढ़ें- पितृ पक्ष 2026: शादी की खरीदारी करने से पहले जान लें जरूरी नियम, अनजाने में न करें ये गलतियां
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।
