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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 22, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    गया में पिण्डदान करने से व्यक्ति की 7 पीढ़ी और 100 कुल का उद्धार हो जाता है

    By Preeti jhaEdited By:
    Updated: Thu, 22 Sep 2016 11:11 AM (IST)

    भारत परंपराओं का देश है। इन परंपराओं का पालन पीढ़ी दर पीढ़ी मनुष्य करता आ रहा है। पितरों का तर्पण करना इन्हीं परंपराओं का अभिन्न अंग है। ...और पढ़ें

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    भारत परंपराओं का देश है। इन परंपराओं का पालन पीढ़ी दर पीढ़ी मनुष्य करता आ रहा है। पितरों का तर्पण करना इन्हीं परंपराओं का अभिन्न अंग है।

    वायु पुराण में बताया गया है कि मीन, मेष, कन्या एवं कुंभ राशि में जब सूर्य होता है उस समय गया में पितरों का तर्पण यानी पिण्ड दान करना बहुत ही उत्तम फलदायी होता है।

    बिहार की राजधानी पटना से 100 किलोमीटर दूर गया में वर्ष में एक बार एक पखवाड़े का मेला लगता है। कहा जाता है पितृ पक्ष में फल्गु नदी के तट पर विष्णुपद मंदिर के करीब और अक्षयवट के पास पिंडदान करने से पूर्वजों को मुक्ति मिलती है।

    गरूड़ पुराण में उल्लेख मिलता है कि गया में पिण्डदान करने मात्र से व्यक्ति की 7 पीढ़ी और 100 कुल का उद्धार हो जाता है। गया तीर्थ के महत्व को स्वयं भगवान राम ने भी स्वीकार किया था।

    शास्त्रों में गया के अलावा पिंडदान के लिए बद्रीनाथ के पास ब्रह्मकपाल सिद्ध क्षेत्र, हरिद्वार में नारायणी शिला के पास लोग पूर्वजों का पिंडदान करते हैं।