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Navratri Story: महाभारत में अर्जुन ने क्यों की थी मां दुर्गा की स्तुति? पढ़ें रावण के चंडी पाठ का राज

Published: Thu, 19 Mar 2026 11:30 AM (IST)

नवरात्र के मौके पर जानें क्यों अर्जुन ने महाभारत युद्ध से पहले की थी मां दुर्गा की उपासना और कैसे ...और पढ़ें

Mahabharata Navratri Story: रावण और अर्जुन से जुड़ी पौराणिक कथा (Image Source: AI-Generated)

Mahabharata Navratri Story: रावण और अर्जुन से जुड़ी पौराणिक कथा (Image Source: AI-Generated)

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धर्म डेक्स, नई दिल्ली। महाभारत और रामायण से जुड़े बड़े-बड़े योद्धाओं ने भी हार मानकर मां दुर्गा की शरण ली थी। नवरात्र का पावन पर्व इसलिए भी काफी प्रसिद्ध है।

महाभारत (Mahabharata ) के भीषण युद्ध की शुरुआत होने वाली थी। पांडवों और कौरवों की सेनाएं आमने-सामने थीं। अर्जुन थोड़े विचलित थे, क्योंकि सामने उनके अपने गुरु और सगे-संबंधी खड़े थे। तब भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को एक बहुत ही महत्वपूर्ण सलाह दी। कृष्ण ने कहा कि युद्ध जीतने के लिए केवल शस्त्र काफी नहीं हैं, तुम्हें 'शक्ति' यानी मां दुर्गा का आशीर्वाद लेना चाहिए।

इस कथा का उल्लेख 'महाभारत' के भीष्म पर्व में मिलता है। कृष्ण के कहने पर अर्जुन ने रथ से उतरकर मां दुर्गा की स्तुति की थी। तब देवी मां ने साक्षात प्रकट होकर अर्जुन को 'विजयी भव' का वरदान दिया था।

Arjun Mahabharat

(Image Source: AI-Generated)

रावण का 'चंडी पाठ' और श्री राम की भक्ति

दूसरी ओर, रामायण (Ramayana) काल में भी एक ऐसी ही रोचक कथा आती है। रावण को हम बुराई का प्रतीक मानते हैं, लेकिन वह देवी मां का परम भक्त भी था। कहा जाता है कि जब राम-रावण का युद्ध चरम पर था, तब रावण ने अपनी विजय सुनिश्चित करने के लिए 'चंडी पाठ' (Chandi Path) का आयोजन किया था। उधर श्री राम ने भी मां को प्रसन्न करने के लिए 108 नीलकमल चढ़ाने का संकल्प लिया।

यह प्रसंग 'देवी भागवत पुराण' और कई क्षेत्रीय रामायणों (जैसे बंगाल की कृत्तिवास रामायण) में मिलता है। रावण की भक्ति में कोई कमी नहीं थी, लेकिन उसकी नियत और अधर्म की राह उसे ले डूबी। जबकि, श्री राम ने अपनी अटूट श्रद्धा से मां को प्रसन्न कर लिया और रावण का अनुष्ठान खंडित हो गया।

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