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    Makar Sankranti 2026: सूर्य देव के रथ में सात घोड़े क्यों होते हैं? जानिए इनका धार्मिक महत्व

    By Digital DeskEdited By: Vaishnavi Dwivedi
    Updated: Sat, 10 Jan 2026 05:00 PM (IST)

    मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2026) पर सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व है, जिनके रथ को सात घोड़े खींचते हैं। इन सात घोड़ों का धार्मिक, ज्योतिषीय और ...और पढ़ें

    Makar Sankranti 2026: सूर्य देव की पूजा। ( Ai Generated)

    Makar Sankranti 2026: सूर्य देव की पूजा। ( Ai Generated)

    HighLights

    1. मकर संक्रांति का दिन बहुत शुभ माना जाता है

    2. यह दिन भगवान सूर्य को समर्पित है

    3. इस दिन पूजा-पाठ का बहुत ज्यादा महत्व है

    दिव्या गौतम, एस्ट्रोपत्री। हर वर्ष 14 जनवरी 2026 को जब देश भर में मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2026) का पर्व मनाया जाता है और इस दिन सूर्य देव की उपासना का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण की शुरुआत होती है। भारतीय संस्कृति में सूर्य को जीवन, ऊर्जा और समय का आधार माना गया है। धार्मिक ग्रंथों और चित्रों में सूर्य देव को सात घोड़ों वाले रथ पर सवार दिखाया गया है।

    अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि सूर्य देव के रथ में सात घोड़े ही क्यों होते हैं और इनका क्या विशेष अर्थ है। इसके पीछे धार्मिक, ज्योतिषीय और वैज्ञानिक तीनों स्तरों पर गहरा महत्व जुड़ा हुआ माना जाता है।

    SURYA DEV

    धार्मिक मान्यताओं में सात घोड़ों का अर्थ

    धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि सूर्य देव के रथ का निर्माण विश्वकर्मा ने किया था और इसे सात घोड़े खींचते हैं। ये सात घोड़े जीवन की सात मूल शक्तियों के प्रतीक माने जाते हैं। कुछ मान्यताओं में इन्हें सात छंदों से जोड़ा गया है, जिनमें गायत्री छंद को विशेष माना जाता है। कहा जाता है कि सूर्य देव की ऊर्जा इन्हीं सात घोड़ों के माध्यम से पूरे सौर मंडल में फैलती है। रथ का एक पहिया वर्ष का और दूसरा समय के चक्र का संकेत देता है। इस प्रकार सात घोड़े समय की निरंतर गति और जीवन के प्रवाह को दर्शाते हैं।

    ज्योतिषीय दृष्टि और वैज्ञानिक दृष्टिकोण

    ज्योतिषीय दृष्टि से सूर्य देव के सात घोड़ों को सप्ताह के सात दिनों से जोड़ा जाता है। भारतीय पंचांग के अनुसार, सप्ताह का पहला दिन रविवार सूर्य को समर्पित है। सूर्य ही समय की गणना का आधार माने जाते हैं। सात घोड़े यह संकेत देते हैं कि सूर्य की गति से ही दिन, सप्ताह और वर्ष का निर्माण होता है। इसी कारण सूर्य को काल पुरुष भी कहा जाता है। सात घोड़ों का एक साथ चलना यह दर्शाता है कि समय कभी रुकता नहीं और निरंतर आगे बढ़ता रहता है।

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    वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो सूर्य के सात घोड़ों को सूर्य किरणों के सात रंगों से जोड़ा जाता है। जब सूर्य का प्रकाश प्रिज्म (Prism) से गुजरता है, तो वह सात रंगों में विभाजित हो जाता है। ये रंग जीवन के लिए आवश्यक ऊर्जा का स्रोत माने जाते हैं। इसी कारण भारतीय ऋषियों ने प्रतीक रूप में सूर्य के रथ में सात घोड़ों की कल्पना की थी। यह दर्शाता है कि सूर्य का प्रकाश ही धरती पर जीवन को संभव बनाता है और हर रंग का अपना अलग महत्व है।

    जीवन, संतुलन और संदेश

    सूर्य देव के रथ में सात घोड़े जीवन में संतुलन और अनुशासन का संदेश भी देते हैं। कुछ मान्यताओं के अनुसार, ये सात घोड़े शरीर की सात प्रमुख शक्तियों (सुरक्षा, रचनात्मकता, शक्ति, प्रेम, अभिव्यक्ति, अंतर्ज्ञान और चेतना) के प्रतीक माने जाते हैं। यदि इन शक्तियों में संतुलन बना रहे, तो जीवन सुचारु रूप से चलता है। मकर संक्रांति जैसे पर्व पर सूर्य की उपासना इसी संतुलन की याद दिलाती है। यह पर्व सिखाता है कि ऊर्जा, समय और अनुशासन का सही उपयोग ही जीवन को आगे बढ़ाता है।

    कुल मिलाकर, सूर्य देव के रथ में सात घोड़े केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं हैं। इनमें समय, ऊर्जा, विज्ञान और जीवन दर्शन का गहरा संदेश छिपा हुआ है। यही कारण है कि सूर्य उपासना को भारतीय परंपरा में विशेष स्थान दिया गया है।

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    लेखक: दिव्या गौतम, Astropatri.com अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए [email protected] पर संपर्क करें।