Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    Makar Sankranti 2026: खिचड़ी खाना जरूरी है या व्रत रखना? जानें 14 जनवरी के संयोग पर क्या कहते हैं शास्त्र

    By Digital DeskEdited By: Vaishnavi Dwivedi
    Updated: Sat, 10 Jan 2026 03:10 PM (IST)

    14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2026) और एकादशी का दुर्लभ संयोग है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन एकादशी के नियम मुख्य हैं, इसलिए खिचड़ी ...और पढ़ें

    Makar Sankranti 2026: खिचड़ी खाने का महत्व।

    Makar Sankranti 2026: खिचड़ी खाने का महत्व।

    HighLights

    1. 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति मनाई जाएगी।

    2. इस दिन एकादशी का संयोग भी बन रहा है।

    3. यह दिन धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है

    दिव्या गौतम, एस्ट्रोपत्री। 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति और एकादशी का दुर्लभ संयोग बन रहा है। यह दिन धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि सूर्यदेव मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं और पौष मास की एकादशी भी इसी दिन है। ऐसे में श्रद्धालुओं के मन में सवाल होता है कि खिचड़ी खाई जाए या व्रत रखा जाए।

    शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि इस दिन एकादशी का नियम सर्वोपरि है। यह अवसर केवल पर्व नहीं, बल्कि धर्म, संयम और पुण्य कर्म का संतुलन सीखने का भी समय है। इस दिन व्रत, पूजा और दान से अधिक पुण्य मिलता है।

    ekadashi 1

    एकादशी व्रत और संक्रांति का संगम

    एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन अनाज खाना वर्जित है। खासकर चावल का सेवन, छूना या दान करना भी नहीं करना चाहिए। जब मकर संक्रांति और एकादशी एक ही दिन पड़ती हैं, तो इस दिन एकादशी का नियम सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए खिचड़ी या अन्य अनाज का सेवन नहीं करना चाहिए।

    यह संयम भक्तों को मानसिक और आध्यात्मिक अनुशासन सिखाता है। इस तरह, व्रत रखने वाले लोग संक्रांति का पुण्य और एकादशी के नियम दोनों का लाभ पा सकते हैं।

    तिल और गुड़ का दान: विशेष महत्व

    इस अवसर पर दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है, लेकिन एकादशी होने के कारण सावधानी आवश्यक है। इस दिन चावल या खिचड़ी का दान वर्जित है। इसके स्थान पर तिल, गुड़, फल, दूध, घी, वस्त्र, कंबल या तिल से बनी खिचड़ी का दान किया जा सकता है। शास्त्रों के अनुसार तिल का दान विशेष पुण्य देता है और पितृ दोष तथा ग्रह दोष को शांत करने में सहायक होता है।

    खबरें और भी

    जो श्रद्धालु मकर संक्रांति का पुण्य और एकादशी का फल दोनों पाना चाहते हैं, उन्हें सुबह पवित्र स्नान कर सूर्यदेव को अर्घ्य देना, भगवान विष्णु की पूजा करना और फलाहार के साथ व्रत रखना चाहिए। अगले दिन द्वादशी पर व्रत का पारण कर अन्न का सेवन किया जा सकता है।

    मकर संक्रांति का महत्व

    मकर संक्रांति सूर्यदेव के उत्तरायण होने का पर्व है। इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। शास्त्रों में इसे देवताओं का दिन माना गया है और इसका महत्व अत्यंत गहरा है। मकर संक्रांति पर पवित्र स्नान, दान और पुण्य कर्म का विशेष महत्व होता है। परंपरा के अनुसार खिचड़ी, तिल, गुड़ और अन्न का दान करना शुभ माना गया है।

    यह दान जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति लाने वाला माना जाता है। इसके अलावा सूर्यदेव को अर्घ्य देना और संकल्प करना इस दिन किए गए कर्मों की प्रभावशीलता को बढ़ाता है। संक्रांति का यह समय नए आरंभ और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक भी माना जाता है।

    यह भी पढ़ें- Makar Sankranti 2026: हिंदू धर्म में काला रंग है अशुभ, तो फिर मकर संक्रांति पर इसे पहनना क्यों माना जाता है शुभ?

    यह भी पढ़ें- मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनेगी, पंडित से जानिए पुण्य स्नान-दान एवं इसके महत्व

    लेखक: दिव्या गौतम, Astropatri.com अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए [email protected] पर संपर्क करें।