Kharmas 2026: सूर्य देव की कृपा के लिए, खरमास की समाप्ति से पहले जरूर कर लें ये काम
16 दिसंबर से खरमास (Kharmas) की शुरुआत हो चुकी है, जो 14 जनवरी 2026 तक चलेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, खरमास की अवधि आध्यात्मिक उन्नति, जप-तप और द ...और पढ़ें

सूर्य देव की कृपा के लिए खास है खरमास
HighLights
खरमास में की जाती है सूर्य देव और विष्णु जी की आराधना
खरमास में इन चीजों का दान करने से मिलता है विशेष लाभ
सूर्य देव को अर्घ्य देने से मिलता है सुख-समृद्दि का आशीर्वाद
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। जब सूर्य, धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तभी से खरमास की शुरुआत होती है। इस अवधि में शुभ व मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नया काम शुरू करने आदि की मनाही होती है।
लेकिन इस माह में आपको सूर्य देव की आराधना से विशेष लाभ मिल सकते हैं। इस दौरान किए गए दान-पुण्य व शुभ कार्यों से साधक को सूर्य देव की कृपा की प्राप्ति होती है, जिससे जीवन के कई समस्याओं का निवारण होता है।
जरूर करें ये काम
खरमास का समय आत्मचिंतन, मंत्र-जप और सेवा-भाव के लिए भी महत्वपूर्ण माना गया है। सूर्य देव और भगवान विष्णु की नियमित आराधना इस मास में विशेष फल प्रदान करती है। ऐसे में आप इस अवधि के समाप्त होने से पहले धर्मग्रंथ जैसे विष्णु सहस्रनाम, सत्यनारायण कथा और भागवत गीता का पाठ आदि कर सकते हैं।

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करें इन चीजों का दान
खरमास में कुछ विशेष चीजों का दान करना भी अत्यंत लाभकारी माना गया है। आप इस अवधि में लाल कपड़े, केसर और काले चने आदि का दान कर सकते हैं, जो अत्यंत शुभ फलदायी रहता है। इससे घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। वहीं बृहस्पति देव (गुरु) की कृपा पाने के लिए खरमास में आप पीले रंग के वस्त्र, हल्दी या चने की दाल आदि का दान कर सकते हैं।
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मिलेगी सूर्य देव की कृपा
खरमास के दौरान रोजाना सूर्योदय से पहले उठकर स्नान-ध्यान करें व उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दें। अर्घ्य के दौरान ॐ घृणि सूर्याय नमः मंत्र का जप करें। आप इस अवधि में रोजाना आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ व सूर्य देव के इन मंत्रों का जप करके भी लाभ प्राप्त कर सकते हैं -

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सूर्य देव के मंत्र -
1. ॐ सूर्यनारायणायः नमः।
2. ऊँ घृणि सूर्याय नमः
3. सूर्य ग्रह के 12 मंत्र -
ॐ आदित्याय नमः।
ॐ सूर्याय नमः।
ॐ रवेय नमः।
ॐ पूषणे नमः।
ॐ दिनेशाय नमः।
ॐ सावित्रे नमः।
ॐ प्रभाकराय नमः।
ॐ मित्राय नमः।
ॐ उषाकराय नमः।
ॐ भानवे नमः।
ॐ दिनमणाय नमः।
ॐ मार्तंडाय नमः।
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