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कलियुग में बीमारियां-चिंताएं बढ़ेंगी, मनुष्य की आयु घटेगी, पढ़ें श्रीमद्भागवत पुराण की भविष्यवाणियां

Published: Sat, 02 May 2026 10:57 AM (IST)

महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित 'श्रीमद्भागवत महापुराण' (12वें स्कंध) में कलियुग की सटीक भविष्यवाणियों का विस्तृत वर्णन मिलता है।

महर्षि वेदव्यास की कलियुग को लेकर सटीक भविष्यवाणी

महर्षि वेदव्यास की कलियुग को लेकर सटीक भविष्यवाणी

HighLights

  1. मानवीय गुणों का पतन होगा, धैर्य घटेगा

  2. धन को चरित्र से अधिक महत्व दिया जाएगा

  3. बीमारियां-चिंताएं बढ़ेंगी, मनुष्य की आयु घटेगी

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म ग्रंथों में कालावधि को चार युगों में बांटा गया है - सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर और कलियुग। वर्तमान में चौथा युग यानी कलियुग चल रहा है। आज से हजारों वर्ष पहले ही 'श्रीमद्भागवत महापुराण' में कलियुग की स्थिति को लेकर कुछ सटीक घोषणाएं कर दी गई थीं। आज के समय में समाज की स्थिति को देखकर ये भविष्यवाणियां बिल्कुल सच साबित होती नजर आती हैं। चलिए जानते हैं इस बारे में।

1. मानवीय गुणों का पतन

ततश्चानुदिनं धर्मः सत्यं शौचं क्षमा दया।
कालेन बलिना राजन् नङ्‌क्ष्यत्यायुर्बलं स्मृतिः॥

अर्थ - कलियुग में समय के साथ धर्म, सत्य, स्वच्छता, सहिष्णुता, दया, आयु, शारीरिक बल और याद रखने की क्षमता दिन-प्रतिदिन घटती जाएगी। आज के समाज में लोगों के घटते धैर्य और कम होती शारीरिक व मानसिक क्षमता के रूप में इसे स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

2. चरित्र से अधिक पूजा जाएगा धन

वित्तमेव कलौ नॄणां जन्माचारगुणोदयः।
धर्मन्याय व्यवस्थायां कारणं बलमेव हि॥

अर्थ - इस युग में जिस व्यक्ति के पास जितना ज्यादा पैसा होगा, उसे उतना ही संस्कारी और गुणी माना जाएगा। न्याय और धर्म की व्यवस्था भी धन और बाहुबल पर ही निर्भर करेगी। कुल मिलाकर इस युग में चरित्र से अधिक धन और शक्ति को महत्व दिया जाएगा।

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(Picture Credit: Freepik)

3. बढ़ जाएगा समाज में दिखावा

दाम्पत्येऽभिरुचिर्हेतुः मायैव व्यावहारिके।
स्त्रीत्वे पुंस्त्वे च हि रतिः विप्रत्वे सूत्रमेव हि॥

अर्थ: कलियुग में स्त्री-पुरुष केवल अपने शारीरिक आकर्षण और रुचि के कारण साथ रहेंगे। व्यापार में सफलता मुख्य रूप से छल-कपट पर निर्भर करेगी। वहीं, लोग ज्ञान के बजाय केवल बाहरी दिखावा करके खुद के सच्चे ज्ञानी होने का दावा करेंगे।

4 बदल जाएगी न्याय की परिभाषा

लिङ्‌गं एवाश्रमख्यातौ अन्योन्यापत्ति कारणम्।
अवृत्त्या न्यायदौर्बल्यं पाण्डित्ये चापलं वचः॥

अर्थ: कलियुग में गरीब के लिए न्याय पाना कठिन होगा। वहीं लोग न्याय पा सकेंगे, जो भारी पैसा खर्च करने की क्षमता रखते हों। इसी के साथ, जो व्यक्ति जितना अधिक वाचाल (बोलने में चालाक) और स्वार्थी होगा, समाज उसे ही असली विद्वान मानेगा।

Bhagavata Purana ai

(Picture Credit- AI Generated)

5. दिखावटी आध्यात्म और स्वार्थ

दूरे वार्ययनं तीर्थं लावण्यं केशधारणम्।
उदरंभरता स्वार्थः सत्यत्वे धार्ष्ट्यमेव हि॥

अर्थ: लोग दूर-दराज की नदियों और सरोवरों को तो तीर्थ मानेंगे, लेकिन अपने ही घर में रह रहे माता-पिता का सम्मान नहीं करेंगे। केवल बाल बढ़ाना या सजना-संवरना ही सुंदरता का प्रतीक मान लिया जाएगा और मनुष्य का एकमात्र लक्ष्य केवल अपना पेट भरना यानी अपना स्वार्थ सिद्ध करना रह जाएगा।

6. बीमारियों और चिंताओं से घिरे रहेंगे लोग

क्षुत्तृड्भ्यां व्याधिभिश्चैव संतप्स्यन्ते च चिन्तया।
त्रिंशद्विंशति वर्षाणि परमायुः कलौ नृणाम्॥

अर्थ: कलियुग में लोग हमेशा भूख, प्यास, तरह-तरह की बीमारियों व मानसिक चिंताओं से घिरे रहेंगे। जैसे-जैसे यह युग अपने चरम पर पहुंचेगा, मनुष्य की अधिकतम आयु घटकर केवल 20 से 30 वर्ष ही रह जाएगी।

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।