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    कालिया नाग ने छिपने के लिए यमुना को ही क्यों चुना? पढ़ें गरुड़ के खौफ और एक श्राप की पूरी कहानी

    Updated: Thu, 16 Jul 2026 05:30 PM (GMT+05:30)

    कालिया नाग और गरुड़ की शत्रुता और कैसे हुई उनके बीच में सुलह? भगवान श्रीकृष्ण के जीवनकाल से जुड़ी यह कथा जो किसी शिक्षा से कम नहीं है। ...और पढ़ें

    कालिया नाग और गरुड़ से जुड़ी पौराणिक कथा (Picture Credits- AI Image)

    कालिया नाग और गरुड़ से जुड़ी पौराणिक कथा (Picture Credits- AI Image)

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    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। श्रीमद्भागवत महापुराण स्कंद 10, अध्याय 17-19 में जब राजा परीक्षित ने श्रीशुकदेवजी से पूछा कि, कालिया नाग ने रमणक द्वीप क्यों छोड़ दिया था? इस पर शुकदेवजी जवाब देते हुए कहते हैं कि, पहले गरुड़ जी के लिए खास नियम बना हुआ था कि, उन्हें हर महीने एक सांप भेंट किया जाएगा।

    नियम के मुताबिक प्रत्येक महीने की अमावस्या को सभी सांप अपनी रक्षा के लिए एक सांप गरुड़ जी को भेंट करते थे। उन्हीं सांपों में कद्रू का बेटा कालिया नाग भी था। वह अपने विष और ताकत के बल पर काफी अहंकारी हो गया था। उसने गरुड़ जी के इस नियम का अपमान करने के साथ उनको भेंट किया गया सांप भी खा जाता था।

    गरुड़ और कालिया नाग के बीच भीषण युद्ध 

    यह सब सुनकर गरुड़ जी को काफी गुस्सा आया। उन्होंने कालिया नाग को मारने का निश्चय किया। गरुड़ और कालिया नाग के बीच काफी भीषण युद्ध शुरू हो गया। कालिया नाग अपने नुकीले दांतों से गरुड़ पर वार करने लगा। भगवान विष्णु के वाहन होने के साथ उनमें अपार बल और पराक्रम है।

    कालिया नाग की इस हरकत को देखकर गरुड़ जी का गुस्सा काफी भड़क उठा, उन्होंने अपने बाएं पंख से जोरदार प्रहार किया। गरुड़ जी के पंख की चोट इतनी भीषण थी कि, कालिया नाग बुरी तरह घायल हो गया। वहां भागकर यमुना जी के उस कुंड में जा छिपा जहां गरुड़ नहीं आ सकता था।

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    गरुड़ और कालिया नाग के बीच युद्ध (AI Image)

    गरुड़ को सौरभि मुनि का मिला श्राप

    इसके पीछे की एक कहानी है कि, एक बार भूखे गरुड़ ने तपस्वी सौभरि मुनि के मना करने पर भी गरुड़ जी अपने पसंद की मछली खाने के लिए कुंड में चले गए। कुंड में अपने मुखिया मत्स्यराज के मारे जाने की वजह से मछलियां आहत हो गई। मछलियों की व्याकुलता और दीन दशा देखकर महर्षि सौभरि मुनि को दया आ गई। उन्होंने कुंड में रहने वाले जीवों की भलाई के लिए गरुड़ को यह श्राप दिया कि, अगर गरुड़ कभी भी इस कुंड में घूसकर मछलियों को खाएगा तो उसी पल मौत हो जाएगी।

    महर्षि सौभरि के इस श्राप की जानकारी कालिया नाग को थी, इसलिए वे गरुड़ के डर से वहां रहने लगा था। कालिया के वहां रहने से उसके जहर के प्रभाव के कारण नदी का जल विषैला हो गया। जिससे पेड़, पौधे, मछलियां और दूसरे जीव मर गए।

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    यमुना नदी में छिपा कालिया नाग (AI Image)

    श्री कृष्ण ने कालिया को हराया

    वृंदावन के लोगों और प्राणियों की रक्षा करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण यमुना नदी में कूद गए और कालिया का डटकर सामना किया। एक भयंकर युद्ध के बाद श्रीकृष्ण ने कालिया के कई फन पर नृत्य (Dance) और बिना उसके प्राण लिए उसका अहंकार खत्म कर दिया। नाग को भगवान श्रीकृष्ण की इस दिव्यता का एहसास हुआ और उन्होंने सरेंडर कर दिया।

    कालिया नाग को दया मिली

    कालिया नाग के साथ उसकी नागपत्नियों ने भी भगवान कृष्ण से माफी मांगी। उनकी भक्ति और कालिया के पछतावे से प्रसन्न होकर भगवान कृष्ण ने उसे छोड़ दिया और यमुना छोड़कर कहीं और निवास करने का आदेश दया। कालिया के सिर पर भगवान कृष्ण के दिव्य पैरों के निशान बना गए, जिस वजह से गरुड़ ने फिर कभी कालिया नाग पर हमला नहीं किया।

    इस पौराणिक कथा से सबसे बड़ी सीख मिलती है कि, जीवन में घमंड सब बर्बाद कर देता है, लेकिन सच्चा पछतावा और भगवान के सामने समर्पण करने से माफी मिलने के साथ सुरक्षा और नई शुरुआत का आगाज होता है।

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    कालिया नाग के सिर पर नृत्य (AI Image)

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