कुंडली में ग्रहों की दशा से जानें कौन-सा रोग आपको हो सकता है?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जन्म कुंडली में ग्रहों की स्थिति हमारे शरीर के रोगों और स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। ...और पढ़ें

कौन-सा ग्रह देता है कौन-सा रोग? (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
ग्रहों की स्थिति स्वास्थ्य और रोगों को प्रभावित करती है।
सूर्य, चंद्रमा, मंगल जैसे ग्रह विभिन्न रोगों से जुड़े हैं।
कमजोर ग्रह आंखों, हृदय, मानसिक समस्याओं का कारण बनते हैं।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। जिस तरह जन्म कुंडली में ग्रहों की स्तिथियां हमारे जीवन और उससे जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं को प्रभावित करने का काम करती है, उसी तरह हमारे शरीर की रचना एवं रोग भी इन ग्रहों की दशा पर निर्भर करती है।
बृहत् पराशर होरा शास्त्र', 'जातक पारिजात', और 'फलदीपिका जैसे धार्मिक ग्रंथों में इसका जिक्र देखने को मिलता है।
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, कुछ ग्रह अकेले ही खास रोग को जन्म देने का काम करते हैं, जबकि कुछ रोग कई ग्रहों के साथ आने से उत्पन्न होते हैं। आइए जानते हैं ग्रह के प्रभावित होने से कौन-कौन से रोग हो सकते है?
सूर्य
कुंडली में सूर्य के प्रभावित होने से आंखों से जुड़ी समस्या, रतौंधी, हृदय से जुड़े रोग, हार्ट अटैक और हड्डियों का रोग हो सकता है।
चंद्रमा
चंद्रमा के प्रभावित होने से खून की कमी, कमजोरी, आंखों का कमजोर होना, दिखाई देने में समस्या, मानसिक रोग, सिर दर्द, सांस लेने में तकलीफ और मिर्गी की दिक्कत हो सकती है।
मंगल
मंगल प्रभावित होने से खून से जुड़ी बीमारियां, किडनी की बीमारी, पीलिया, पेशाब से जुड़ी समस्या देखने को मिल सकती है।
बुध
कुंडली में बुध की खराब स्थिति सर्दी, जुकाम, खांसी, गले का रोग,लीवर से जुड़ी समस्या, लंगड़ापन, स्तन के रोग की समस्या देखने को मिल सकती है।

बृहस्पति
बृहस्पति कमजोर होने से कंठ रोग की दिक्कत, हकलाना, सांस, अस्थमा, आंतों का रोग, चरम रोग, दाद-खुजली,फोड़ा-फुंसी की समस्या सता सकती है।
शुक्र
कुंडली में शुक्र की कमजोरी से व्यक्ति को वीर्य क्षीणता, शुक्राणुओं में कमी, गला, यौन से जुड़े रोग, पुरुषत्व की कमी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
शनि
शनि की महादशा का शरीर पर में योनी, लिंग, वायु विकार, मूर्छा, हिस्टीरिया, विषपान जैसे रोग का सामना करना पड़ सकता है।
राहु
राहु से परेशान व्यक्ति को हृदय रोग, कैंसर, मिर्गी, वायु विकार, बवासीर, तिल्ली के रोग, गर्मी, लू का प्रकोप, चेचक, ताप की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
केतु
केतु के प्रभाव से रक्त की कमी, खूनी दस्त, मूत्र से जुड़े रोग, हैजा, स्किन संबंधी रोग, नामर्दी, बवासीर की समस्या देखने को मिल सकती है।
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