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जानिए कैसे चंद्र देव की कलाएं बदलती हैं आपकी भावनाएं और भाग्य?

Published: Fri, 26 Jun 2026 07:00 AM (IST)

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, चंद्रमा की कलाओं का घटना-बढ़ना हमारे मन, भावनाओं और भाग्य को सीधे प्रभावित करता है। शुक्ल ...और पढ़ें

चंद्रमा की कलाएं कैसे बदलती हैं आपकी किस्मत

चंद्रमा की कलाएं कैसे बदलती हैं आपकी किस्मत

HighLights

  1. चंद्रमा की कलाएं मन, भावनाओं और भाग्य को प्रभावित करती हैं।

  2. शुक्ल पक्ष उत्साह बढ़ाता है, कृष्ण पक्ष ऊर्जा घटाता है।

  3. मन को शांत रखने के लिए व्रत और शिव भक्ति सहायक हैं।

चंद्रेश शर्मा, एस्ट्रोपत्री। हमारी सनातन परंपरा और वैदिक ज्योतिष में एक बहुत ही सुंदर बात कही गई है "चन्द्रमा मनसो जातः", जिसका सरल अर्थ है कि चंद्र देव की उत्पत्ति साक्षात कालपुरुष के मन से हुई है। यही सबसे बड़ा कारण है कि आकाश में पल-पल बदलती चंद्र देव की कलाओं का घटना और बढ़ना सीधे हमारे मन, हमारी गहरी भावनाओं और हमारे भाग्य से जुड़ा हुआ है। 

अगर हम इसे विज्ञान के नजरिए से भी देखें, तो हमारे शरीर में लगभग 70% जल तत्व होता है। जिस तरह पूर्णिमा और अमावस्या के दिनों में चंद्र देव के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण विशाल समुद्र में ऊंची-ऊंची लहरें उठती हैं, ठीक उसी तरह हमारे शरीर और मस्तिष्क के अंदर मौजूद तरल पदार्थ भी चंद्र देव की इन कलाओं से गहरे प्रभावित होते हैं। धरती के सबसे पास होने के कारण चंद्र देव का खिंचाव और उनकी किरणें हमारे पूरे अस्तित्व को छूती हैं।

जानिए कैसे बदलता है आपका मन और भावनाएं 

वैदिक ज्योतिष हमें सिखाता है कि भाग्य सिर्फ मेहनत से नहीं बनता, बल्कि सही समय पर सही निर्णय लेने से बनता है। आपकी बुद्धि कितनी भी तेज क्यों न हो, अगर आपका मन अंदर से अशांत या विचलित है, तो भाग्य का साथ मिलना बहुत कठिन हो जाता है।

चंद्र देव की दो मुख्य गतियां हमारे रोज के जीवन को बहुत गहराई से प्रभावित करती हैं:

शुक्ल पक्ष (अमावस्या से पूर्णिमा की ओर): जब चंद्र देव अमावस्या से पूर्णिमा की तरफ बढ़ते हैं, तो इसे शुक्ल पक्ष कहते हैं। जैसे-जैसे चंद्र देव का आकार और उनकी सुंदर रोशनी बढ़ती है, हमारे मन में एक नया उत्साह और कुछ नया करने की प्रेरणा जगती है। इस दिनों में जो भी फैसले लिए जाते हैं, वे बहुत साफ और दूर की सोच वाले होते हैं। पूर्णिमा का पूरा चांद हमारे मन को पूरी ऊर्जा और कोमलता से भर देता है।

कृष्ण पक्ष (पूर्णिमा से अमावस्या की ओर): जब चंद्र देव पूर्णिमा से अमावस्या की तरफ जाते हैं, तो उनकी ऊर्जा धीरे-धीरे कम होने लगती है। ज्योतिष में इसे क्षीण चंद्र देव कहा जाता है। इस समय के दौरान मन में अकेले रहने की इच्छा, नींद न आना और अनजाना सा डर पैदा होने की स्थिति बन सकती है। अमावस्या तक आते-आते जब चांद पूरी तरह छिप जाता है, तब मन की ऊर्जा अपने सबसे निचले स्तर पर होती है, जिससे उलझन और फैसला न ले पाने की स्थिति बन सकती है।

मन और भाग्य को संतुलित रखने के सरल रास्ते

चंद्र देव का घटना और बढ़ना तो प्रकृति का एक अटूट नियम है। अपने मन को शांत रखने और भाग्य को मजबूत बनाने के लिए हमारे ऋषियों-मुनियों ने बहुत ही सरल तरीके बताए हैं:

पूर्णिमा और अमावस्या के व्रत: इन खास तिथियों पर व्रत या उपवास रखने से हमारे शरीर और मन के अंदर मौजूद तरल तत्वों का संतुलन बहुत अच्छा बना रहता है।

शांत बैठना और आत्म-निरीक्षण: चंद्र देव की बदलती चाल के समय कुछ देर शांत बैठकर अपने विचारों को देखना मन के भटकाव को पूरी तरह रोक देता है।

भगवान शिव की शरण: देवों के देव महादेव के मस्तक पर स्वयं चंद्र देव विराजमान हैं, इसलिए भगवान शिव की भक्ति करने से मन के सारे दुख और विकार अपने आप शांत हो जाते हैं।

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लेखक: श्री चंद्रेश शर्मा, astropatri.com, फीडबैक के लिए लिखें: [email protected]