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    कुंडली में मिल रहे हैं 27 गुण, तो जानिए विवाह के बाद कैसा रहता है दांपत्य जीवन?

    Updated: Fri, 03 Jul 2026 06:44 PM (IST)

    हिंदू धर्म में विवाह के लिए कुंडली मिलान महत्वपूर्ण है, खासकर जब 27 गुण मिलते हैं, तो इसे बहुत शुभ माना जाता है। यह दांपत्य जीवन में मधुरता, आपसी समझ ...और पढ़ें

    कुंडली मिलान में जब 36 में से  27 गुण मिलना का अर्थ (Picture Credit- AI Generated)

    कुंडली मिलान में जब 36 में से 27 गुण मिलना का अर्थ (Picture Credit- AI Generated)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में शादी के दौरान सबसे महत्‍वपूर्ण होता है वर और वधू की कुंडली का मिलान। जैसे ही जरूरत भर के गुणों का मिलान हो जाता है, वैसे ही शादी पक्‍की कर दी जाती है। ममगर बहुत कम लोगों को इस बारे में जानकारी होती है कि कुंडली के कितने गुणों के मिलने पर विवाह के बाद दांपत्‍य जीवन पर कैसा असर होता है। खासतौर पर यदि कुंडली मिलान के दौरान 27 गुण मिलते तो इसका क्‍या मतलब होता है, चलिए जानते हैं।

    27 गुण मिलने का क्‍या अर्थ होता है?

    विवाह से पूर्व वर और वधू की जो राशियां होती हैं, उनके आधार पर गुणों का मिलान किया जाता है। यह गुण 36 तरह के होते हैं। 36 में से 27 गुण मिल जाएं, तो इसे बहुत अच्छा माना जाता है।

    ऐसे जोड़ों का शादी के बाद दांपत्‍य जीवन बहुत ही मधुर होता है। इनकी सोच आपस में मिलती है, शारीरिक संबंध बनाने से लेकर संतान प्राप्ति तक किसी में में कोई अड़चन नहीं आती है।

    ऐसे जोड़े बहुत ही जिम्‍मेदारी के साथ अपने गृहस्‍थ जीवन को जीते हैं। सबसे अच्‍छी बात यह है कि पति-पत्‍नी में आपसी समझ, प्रेम और लगाव के साथ-साथ एक दूसरे के लिए सम्‍मान भी होता है।

    कुल मिलाकर यदि किसी जातक की कुंडली मिलान के वक्त वर या वधू से 27 गुण मिल जाएं और आपसी सहमति हो, तो दांपत्य जीवन में कोई बड़ी कठिनाई नहीं आती है।

    27 guna match kundli marriage life(Picture Credit- AI Generated)

    कितने गुण मिलना शुभ माना जाता है?

    • कुंडली मिलान के वक्त वर और वधू के 36 गुणों में कम-से-कम 18 गुण जरूर मिलने चाहिए। इससे कम गुण मिलते हैं, तो विवाह के लिए इसे ज्यादा अच्छा नहीं माना जाता है।
    • यदि किसी के 24 गुण मिलते हैं, तो विवाह के लिए इसे ठीक माना जाता है और ऐसे जोड़ों को विवाह कर दिया जाए, तो उनके बीच शादी के बाद थोड़े बहुत वैचारिक मतभेद हो सकते हैं। बाकी सब ठीक रहता है।
    • सबसे अच्‍छा जोड़ा उन्‍हें माना जाता है, जिनके 36 में से 32 गुण मिलते हैं। ऐसे लोग एक दूसरे के लिए बहुत शुभ होते हैं। विवाह के बाद दोनों की ही आर्थिक तरक्‍की होती है और दोनों लोग अपने रिश्‍ते में बहुत अच्‍छे से सामंजस्‍य बैठा लेते हैं।
    • 32 गुणों से अधिक गुणों का मिलना भी अच्छा नहीं होता है। इससे रिश्ते में भ्रम पैदा हो सकता है और रिश्ते को निभाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। रामायण के अनुसार भगवान श्रीराम और माता सीता का जब विवाह हुआ था तब उनके 36 में से 36 गुण मिले थे। लेकिन बाद में रिश्ते में भ्रम पैदा हुआ और दोनों को एक-दूसरे के वियोग में जीवन काटना पड़ा।

    अतः शादी से पूर्व कुंडली मिलान करते वक्त वर और वधू दोनों पक्ष के लोगों को ऊपर दी गई जानकारी पर जरूर विचार कर लेना चाहिए।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

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