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    Garuda Purana: अकाल मृत्यु का कारण बनती हैं ये 5 गलतियां, गरुड़ पुराण में छिपा है आपकी उम्र का रहस्य

    Updated: Thu, 05 Feb 2026 04:36 PM (IST)

    क्या आप जानते हैं कि मनुष्य की उम्र केवल शारीरिक स्वास्थ्य पर नहीं, बल्कि उसके कर्मों पर भी निर्भर करती है? अक्सर हम जाने-अनजाने ऐसे काम कर बैठते हैं ...और पढ़ें

    गरुड़ पुराण के नियम (Image Source: AI-Generated)

    गरुड़ पुराण के नियम (Image Source: AI-Generated)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में गरुड़ पुराण (Garuda Purana) का विशेष स्थान है। यह ग्रंथ हमें बताता है कि मृत्यु कभी अचानक नहीं आती, बल्कि हमारे कर्म उसके लिए मार्ग तैयार करते हैं। भगवान विष्णु के अनुसार, मनुष्य अपनी आयु का एक बड़ा हिस्सा अपने ही हाथों नष्ट कर देता है।

    अकाल मृत्यु की वजह बनने वाले 5 प्रमुख पाप और कारण:

    1. ब्रह्म मुहूर्त का अपमान और देर तक सोना

    गरुड़ पुराण के अनुसार, सूर्योदय के बाद तक सोना स्वास्थ्य और आयु दोनों के लिए हानिकारक है। ब्रह्म मुहूर्त की वायु अमृत समान होती है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, जो व्यक्ति इस समय का लाभ नहीं उठाता, उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता घटने लगती है, जो असमय मृत्यु का कारण बनती है।

    2. बासी और तामसिक भोजन का सेवन

    शास्त्रों और आयुर्वेद का मानना है कि रात का बचा हुआ बासी मांस या दूषित भोजन शरीर में विषैले तत्व पैदा करता है। गरुड़ पुराण के अनुसार जो लोग अपनी जठराग्नि का सम्मान नहीं करते और अभक्ष्य भोजन करते हैं, यमराज उन्हें समय से पहले अपने द्वार पर बुला लेते हैं।

    3. पराई स्त्री या पुरुष पर बुरी नजर

    पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, अनैतिक संबंध बनाना न केवल एक सामाजिक अपराध है, बल्कि यह आपकी मानसिक और शारीरिक ऊर्जा को सोख लेता है। कामवासना में अंधा होकर अधर्म की राह पर चलने वालों की आयु बहुत तेजी से घटती है।

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    4. अहंकार और बड़ों का अपमान

    गरुड़ पुराण में कहा गया है कि जो व्यक्ति अपने माता-पिता, गुरु या बुजुर्गों का अनादर करता है, उससे लक्ष्मी और आयु दोनों रूठ जाती हैं। पौरणिक कथाओं के मुताबिक, बड़ों का श्राप या उनका दुखी मन व्यक्ति की रक्षा कवच को नष्ट कर देता है।

    5. स्वच्छता का अभाव (अपवित्रता)

    धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, जो लोग शारीरिक और मानसिक शुद्धि का ध्यान नहीं रखते, वे नकारात्मक ऊर्जा के घेरे में आ जाते हैं। गरुड़ पुराण के अनुसार, अपवित्रता दरिद्रता और बीमारियों को निमंत्रण देती है, जो अकाल मृत्यु का प्रमुख कारण बनती है।

    गरुड़ पुराण के अनुसार आयु रक्षा के नियम:

    जल्दी जागना: सूर्योदय से पहले उठकर ईश्वर का ध्यान करें।

    सात्विक आहार: हमेशा ताजा और शुद्ध भोजन ग्रहण करें।

    धर्म का पालन: अपनी वाणी और कर्मों में सत्य और परोपकार को स्थान दें।

    पवित्रता: प्रतिदिन स्नान और स्वच्छ वस्त्रों का धारण करना अनिवार्य है।

    दान-पुण्य: अपनी क्षमता अनुसार जरूरतमंदों की मदद करें, इससे अकाल मृत्यु का भय टलता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।