क्या हर गणेश प्रतिमा का विसर्जन करना जरूरी है? बप्पा की विदाई से पहले दूर कर लें अपना कन्फ्यूजन
अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन के नियमों को लेकर अक्सर लोगों में भ्रम रहता है। ज्योतिषाचार्य चंद्रेश शर्मा ने मिट्टी, ...और पढ़ें
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गणेश विसर्जन नियम। (Picture Credit- AI Generated)निय
HighLights
गणेश चतुर्थी की मिट्टी की प्रतिमाओं का विसर्जन करना चाहिए।
घर में रखी धातु या स्फटिक की मूर्ति का विसर्जन नहीं करें।
सूतक या अकाल मृत्यु दोष में गणेश विसर्जन से बचना चाहिए।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, आज यानी 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी में मनाई जा रही है। अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन किया जाता है। गणेश उत्सव में घर-घर बप्पा की स्थापना कर विधि-विधान से पूजा, आरती और भोग लगाने की परंपरा है। इसके बाद शुभ मुहूर्त में उनका विसर्जन किया जाता है। लेकिन कई लोगों के मन में यह उलझन रहती है कि क्या घर में रखी हर गणेश प्रतिमा का विसर्जन करना अनिवार्य है?
इस असमंजस को दूर करने के लिए 'एस्ट्रोपत्री' के ज्योतिषाचार्य श्री चंद्रेश शर्मा ने गणेश स्थापना और विसर्जन से जुड़े कुछ खास नियम बताए हैं। आइए जानते हैं बप्पा की मूर्ति स्थापना और विदाई से जुड़े इन जरूरी नियमों के बारे में, जिनका ध्यान रखना बेहद आवश्यक है।
सूतक या अशौच की स्थिति
यदि परिवार में जन्म या मृत्यु के कारण सूतक अथवा अशौच की स्थिति चल रही हो, तो नई गणेश प्रतिमा की स्थापना नहीं करनी चाहिए और यदि कर ली है, तो उसका विर्सजन नहीं करना चाहिए।
पूजा के नियम निभाना संभव न हो
गणपति स्थापना केवल प्रतिमा रखने तक सीमित नहीं होता है, इसके कुछ जरूरी नियम होते हैं। स्थापना के बाद नियमित पूजा, आरती, भोग और स्वच्छता का ध्यान रखना भी जरूरी होता है। कई बार ऐसा हम नहीं कर पाते हैं, क्योंकि हमारे पास समय की कमी होती है। इसलिए जिन लोगों के लिए स्थापित प्रतिमा की नियमित सेवा करना संभव न हो, वे अस्थायी गणेश स्थापना करने से पहले अपनी सुविधा और पारिवारिक परंपरा पर विचार कर सकते हैं।
क्या हर गणेश प्रतिमा का विसर्जन होता है?
गणेश प्रतिमा के विसर्जन का नियम प्रतिमा के प्रकार और उसकी स्थापना के उद्देश्य पर निर्भर करता है।
मिट्टी की गणेश प्रतिमा
गणेश चतुर्थी के लिए विशेष रूप से स्थापित मिट्टी की प्रतिमा का निर्धारित पूजा अवधि के बाद विसर्जन कर देना चाहिए है। इसका भाव यह है कि जिस प्रतिमा में भक्त ने श्रद्धापूर्वक पूजा की, वह अंत में प्रकृति में वापस विलीन हो जाती है।
धातु या स्फटिक की स्थायी मूर्ति
घर के मंदिर में रखी सोने, चांदी, पीतल या अन्य धातु की स्थायी गणेश मूर्ति का सामान्यतः विसर्जन नहीं किया जाता। इसी तरह स्फटिक की स्थायी मूर्ति को भी पूजा स्थान पर रखकर नियमित पूजा करने की परंपरा है।
जिन पर हो अकाल मृत्यु का दोष
श्री गणेश को विघ्न हरता कहा जाता है। जिन लोगों पर अकाल मृत्यु का दोष बन रहा होता है, उन्हें कभी भी गणपति विसर्जन नहीं करना चाहिए। हां, वे लोग घर में गणपति की स्थापना कर सकते हैं या पहले से स्थापित श्री गणेश की पूजा कर सकते हैं। मगर उन्हें विर्सजित नहीं करना चाहिए।
विसर्जन से पहले रखें इन बातों का ध्यान
विसर्जन से पहले भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा करें, आरती करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग अर्पित करें। इसके बाद परिवार के सदस्य गणपति से सुख-समृद्धि और मंगल की प्रार्थना करते हुए विसर्जन करें।
बप्पा को विदा करने का भाव
गणेश विसर्जन केवल प्रतिमा को जल में प्रवाहित करने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि पूजा के समापन और भगवान के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर माना जाता है। इसलिए नियमों के साथ-साथ भक्ति, स्वच्छता और पर्यावरण की जिम्मेदारी का भी ध्यान रखना चाहिए।
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