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साल 2026 में गणेश चतुर्थी कब मनाया जाएगा? पढ़ें मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और आरती

Published: Sun, 05 Jul 2026 06:00 PM (IST)

गणेश चतुर्थी इस साल कब मनाया जाएगा। जानिए तिथि, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त समेत गणेश चतुर्थी से जुड़ी संपूर्ण जानकारी आरती समेत!

गणेश चतुर्थी का पर्व 2026 में कब है? (Picture Credit- AI Generated)

गणेश चतुर्थी का पर्व 2026 में कब है? (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। गणपति बप्पा मोरया! इस जयकारे के साथ देशभर के भक्तों का एक साल का लंबा इंतजार तब खत्म होता है, जब भगवान गणेश के जन्मदिन के भव्य उत्सव को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है।

गणेश चतुर्थी का वो खास दिन, जब भगवान गणेश को बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के देवता के रूप में पूजा जाता है। माना जाता है कि, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश जी का जन्म हुआ था। आइए जानते हैं गणेश चतुर्थी 2026 से जुड़ी तिथि, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त समेत संपूर्ण जानकारी के बारे में।

साल 2026 में गणेश चतुर्थी कब?

गणेश चतुर्थी 2026 तिथि- 15 सितंबर 2026, मंगलवार के दिन

चतुर्थी तिथि की शुरुआत- 14 सितंबर 2026 को रात 11 बजकर 48 मिनट पर

चतुर्थी तिथि समाप्त- 15 सितंबर 2026 को रात 8 बजकर 39 मिनट पर

गणपति स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त- 15 सितंबर 2026 को सुबह 11 बजकर 1 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 28 मिनट तक

गणेश विसर्जन शुभ मुहूर्त- 25 सितंबर 2026 शुक्रवार

गणेश चतुर्थी 2026 पूजा विधि

  • गणेश चतुर्थी के मौके पर आप घर भी सरल विधि के साथ भगवान गणेश की पूजा कर सकते हैं।
  • सबसे पहले पूजा स्थल को अच्छे से साफ कर लें। इसके बाद गंगाजल का छिड़काव करें। एक चौकी पर लाल या पीला आसन बिछाएं।
  • चौकी पर अक्षत (चावल) रखकर भगवान गणेश की मूर्ति को स्थापित करें।
  • ऊं गं गणपतये नम: मंत्र का जाप करने के साथ गणेश जी का आवाहन करें।
  • भगवान गणेश की मूर्ति को पंचामृत और फिर शुद्ध पानी से स्नान कराएं।
  • इसके बाद गणेश जी को कपड़े, चंदन, जनेऊ, सिंदूर, दूर्वा और फल-फूल अर्पित करने चाहिए। उन्हें लाल फूल खासतौर से अर्पित करने चाहिए।
  • गणेश जी का प्रिय भोग उकडीचे मोदक का भोग जरूर लगाएं। इसके अलावा फल या अन्य मिठाइयां भी चढ़ा सकते हैं।
  • घी का दीपक जलाकर भगवान गणेश की आरती करें।
  • आरती समाप्त होने के बाद भगवान गणेश के सामने अपनी मनोकामना बोलें और उनकी कृपा के लिए सच्चे मन से प्रार्थना करें।

गणेशोत्सव अर्थात् गणेश चतुर्थी का भव्य उत्सव 10 दिन बाद यानी अनंत चतुर्दशी के दिन समाप्त होगा। इस दिन गणेश जी को जल में विसर्जित किया जाता है। इस मौके पर श्रद्धालु बड़े-बड़े जुलूस यात्रा निकालते हैं और आखिर में भगवान गणेश की प्रतिमा सरोवर, नदी या तालाब में विसर्जित कर देते हैं।

श्री गणेश जी की आरती (Ganesh Ji Ki Aarti)

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी ।

माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती (माता पार्वती के मंत्र), पिता महादेवा ॥

पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा ।

लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया ।

बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी ।

कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।