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महादेव या फिल्मी अवतार नहीं, शास्त्रों के अनुसार गणेश चतुर्थी पर कैसी होनी चाहिए बप्पा की मूर्ति?

Published: Fri, 21 Aug 2026 10:30 AM (IST)

गणेश चतुर्थी पर कस्टमाइज मूर्तियों की पूजा को लेकर शास्त्रों में स्पष्ट नियम हैं। देवताओं के स्वरूप में बदलाव करना ...और पढ़ें

गणेश चतुर्थी पर बप्पा की कैसी मूर्ति खरीदें?

गणेश चतुर्थी पर बप्पा की कैसी मूर्ति खरीदें?

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर साल करोड़ों लोग गणेश चतुर्थी का बेसब्री से इंतजार करते हैं ताकि बप्पा का स्वागत कर सके। भारत के सबसे लोकप्रिय त्योहारों में से एक है गणेश चतुर्थी का पर्व जो भगवान गणेश की पूजा, उपासना और सेवा का प्रतीक है।

इस साल गणेशोत्सव 14 सितंबर 2026, सोमवार के दिन मनाया जाएगा, जो 10 दिनों तक चलेगा।

भारत में गणेश चतुर्थी के मौके पर जगह-जगह गणपति पंडाल लगाए जाते हैं। इन पंडालों में भगवान गणेश की भव्य मूर्तियां स्थापित होती है। लेकिन बदलते दौर के साथ आजकल गणपति बप्पा की मूर्तियों में तरह-तरह की क्रिएटिविटी देखने को मिलती है।

कहीं गणेश जी को महादेव के रूप में दर्शाया जाता है, तो कहीं नारायण के रूप में, कहीं उन्हें साधु-संतों के भेष में तो कहीं प्रसिद्ध फिल्मी पात्रों और मनुष्यों के चेहरे के साथ स्थापित किया जाता है।

लेकिन आपने कभी सोचा है कि, क्या देवमूर्ति को किसी भी रूप में बनाया जा सकता है? क्या भगवान गणेश की कस्टमाइज मूर्तियों की पूजा करने का विधान है और इसपर शास्त्र क्या कहते हैं? आइए जानते हैं इसके बारे में।

कस्टमाइज मूर्तियों की पूजा करनी सही या गलत?

हिंदू धर्म ग्रंथों और शास्त्रों में प्रत्येक देवता की अपनी स्वतंत्र सत्ता, रूप और गुणों को निर्धारित किया गया है। पुराणों और आगम शास्त्रों में ऐसा कहीं भी लिखा नहीं है कि, किसी भी देवता की मूर्ति में दूसरे देवता का चेहरा लगाना चाहिए। 

बल्कि प्रत्येक देवता का रूप उसकी तत्व शक्ति का प्रकट स्वरूप होता है। ऐसे में किसी भी देवता की मूर्ति का स्वरूप बदलना विकृति कहा जाता है।

मूर्ति का स्वरूप जैसे शास्त्रों में बताया गया है, वैसे ही होना चाहिए। किसी दूसरे देवता का रूप मिलाना, संतों का रूप मिलाना या फिर मनुष्यों का रूप मिलाना इसे वर्जित माना जाता है और यह शास्त्र समम्मत के खिलाफ है।

इसके अलावा प्रत्येक देवता के हाथों में कौन-सा आयुध हो, कौन-सी मुद्रा हो ये निश्चित होता है। जैसे भगवान विष्णु के हाथों में शंख, चक्र और गदा होता है, वैसे ही भगवान गणेश के हाथों में पाश, अंकुश, मोदक और अभय मुद्रा होती है।

भगवान गणेश की मूर्ति खरीदते समय इन बातों का ख्याल रखना बेहद जरूरी है। अगर मूर्ति शास्त्र के अनुसार न बनी हो तो दैवीय शक्ति का आवेश उस मूर्ति में नहीं होता है।

इस बार गणेश चतुर्थी से पहले भगवान गणेश की मूर्ति खरीदने जाए, तो फैंसी या कस्टमाइज मूर्तियों को खरीदने के बजाय शास्त्र सम्मत मूर्ति खरीदें और सच्चे मन से उनकी पूजा करें।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।