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Chaitra Navratri 2026: नवरात्र और सोमवार का शुभ संयोग, शिवलिंग पर चढ़ाएं ये सामग्री, महाकाल हर लेंगे आपके सारे कष्ट

Updated: Sun, 22 Mar 2026 03:00 PM (IST)

चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri 2026) का पांचवां दिन स्कंदमाता को समर्पित है। यह दिन शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक माना जा रहा है। आइए इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं, जो इस प्रकार हैं।

Chaitra Navratri 2026: नवरात्र और सोमवार एक साथ (Ai Generated Image)

Chaitra Navratri 2026: नवरात्र और सोमवार एक साथ (Ai Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Chaitra Navratri 2026: 23 मार्च यानी नवरात्र के पांचवे दिन और सोमवार का संयोग बेहद शुभ माना जा रहा है। चैत्र नवरात्र का पावन पर्व हर साल भक्ति भाव के साथ मनाया जाता है। नवरात्र का पांचवां दिन स्कंदमाता को समर्पित है। लेकिन इस बार यह दिन सामान्य नहीं है, क्योंकि इस दिन सोमवार का अद्भुत संयोग बना है, जो महादेव और शक्ति के मिलन का प्रतीक है। शास्त्रों में नवरात्र के दौरान पड़ने वाले सोमवार को बहुत कल्याणकारी माना गया है। अगर आप लंबे समय से किसी बड़ी समस्या से परेशान हैं, इस पावन मौके पर शिवलिंग पर विशेष सामग्री चढ़ाएं, जो इस प्रकार हैं -

shivling remedies 2

 

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शक्ति और शिव का मिलन

नवरात्र में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है, जो शक्ति का प्रतीक हैं। वहीं, सोमवार भगवान शिव का प्रिय दिन है। ऐसे में इस दिन शिव-शक्ति की एक साथ विधिवत पूजा करें। इससे अखंड सौभाग्य और आरोग्य की प्राप्ति होती है। ऐसा कहा जा रहा है कि इस दिन किया गया छोटा सा उपाय भी दोगुना फल देता है, क्योंकि शिव के बिना शक्ति अधूरी मानी गई है।

शिवलिंग पर जरूर चढ़ाएं ये सामग्री

कच्चा दूध और काले तिल

अगर चंद्रमा कमजोर है या मन अशांत रहता है, तो चांदी के लोटे में कच्चा दूध और थोड़े काले तिल मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। इससे मानसिक तनाव कम होता है। साथ ही चंद्र दोष से भी राहत मिलती है।

शहद और गंगाजल

आर्थिक तंगी से परेशान हैं, तो शिवलिंग पर शहद चढ़ाएं और फिर गंगाजल से अभिषेक करें। इस उपाय को करने से धन के नए मार्ग बनते हैं। साथ ही घर में स्थायी लक्ष्मी का वास होता है।

बिल्व पत्र और अक्षत

5 या 11 अखंडित बिल्व पत्र पर चंदन से 'राम' लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं और साथ में बिना टूटे हुए चावल अर्पित करें। ऐसा करने से महादेव आपकी हर इच्छा पूरी करते हैं। साथ ही शिव-पार्वती की कृपा मिलती है।

पूजा मंत्र (Puja Mantra)

ॐ मृत्युंजयमहादेवं त्राहि मां शरणागतम्। जन्ममृत्युजराव्याधिपीडितं कर्मबन्धनै:॥
ॐ नमः शिवाय शान्ताय तेजसे सर्वाधिष्टानाय सर्वसमर्थाय सर्वविलाय महेश्वराये नमः शिवाय ॐ॥
वंदे सूर्य शशांक वह्नि नयनं वंदे मुकुंद प्रियं, वंदे भक्त जनाश्रयं च वरदं वंदे शिवं शंकरम्॥

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अस्वीकरण: ''इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है''।