Chaitra Amavasya 2026: चैत्र अमावस्या को क्यों कहते हैं भूतड़ी अमावस्या? जानें इसके पीछे का रहस्य
साल 2026 में चैत्र अमावस्या (Chaitra Amavasya 2026) 18 मार्च को मनाई जाएगी। ...और पढ़ें

Chaitra Amavasya 2026: चैत्र अमावस्या का धार्मिक महत्व। (Ai Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Chaitra Amavasya 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को चैत्र अमावस्या मनाई जाती है। यह दिन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके साथ कुछ बेहद रहस्यमयी और डरावनी मान्यताएं भी जुड़ी हुई हैं। आइए जानते हैं कि इस अमावस्या के साथ भूत शब्द क्यों जुड़ा है और इसके पीछे का गहरा रहस्य क्या है?

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क्यों पड़ा भूतड़ी अमावस्या नाम?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चैत्र अमावस्या की रात नकारात्मक शक्तियां बहुत ज्यादा सक्रिय हो जाती हैं। इसके अलावा ये भी माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा का प्रभाव कम होने से पृथ्वी पर भारी अंधेरा होता है, जिस वजह से नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक हो जाता है। ऐसी मान्यता है कि जिन लोगों पर नकारात्मक प्रभाव होता है, वे इस दिन पवित्र नदियों में स्नान कर उन शक्तियों से मुक्ति पा सकते हैं। इसी प्रेत बाधा से मुक्ति के कारण इसे 'भूतड़ी अमावस्या' कहा जाने लगा।
ज्योतिषीय और आध्यात्मिक वजह
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अमावस्या पर सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि में होते हैं, जिससे चंद्रमा का प्रभाव कम हो जाता है। चंद्रमा मन का कारक है, इसलिए इस दिन मन संवेदनशील होता है। यही वजह है कि नकारात्मक विचार या शक्तियां व्यक्ति पर जल्दी हावी हो सकती हैं। आध्यात्मिक रूप से, यह दिन अपने अंदर के काम, क्रोध, लोभ, मोह को खत्म करने का विशेष अवसर होता है।
चैत्र अमावस्या के नियम
- सुबह किसी पवित्र नदी में स्नान करें। अगर संभव न हो, तो पानी में गंगाजल डालकर नहाएं।
- अपने पूर्वजों के नाम पर दान और तर्पण करें। इससे पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
- नकारात्मक शक्तियों से बचने के लिए हनुमान जी की पूजा करें।
- अमावस्या की रात किसी सुनसान जगह, श्मशान या चौराहे पर जाने से बचें।
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