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'लोग क्या कहेंगे'? गीता का एक श्लोक इस डर से हमेशा के लिए दिला सकता है मुक्ति

Published: Fri, 09 Oct 2026 07:00 AM (IST)Updated: Fri, 09 Oct 2026 08:15 AM (IST)

अक्सर 'लोग क्या कहेंगे' का डर व्यक्ति को अपनी इच्छा से जीने और आगे बढ़ने से रोकता है। श्रीमद्भगवद्गीता का ...और पढ़ें

भगवद्गीता का यह श्लोक दिलाएगा भय से मुक्ति (Picture Credit: AI Generated)

भगवद्गीता का यह श्लोक दिलाएगा भय से मुक्ति (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. 'लोग क्या कहेंगे' का डर व्यक्ति की आजादी छीन लेता है।

  2. श्रीमद्भगवद्गीता का श्लोक स्वधर्म पालन और स्वयं पर भरोसा सिखाता है।

  3. दूसरों से तुलना छोड़ अपनी जिम्मेदारी और स्वभाव को समझें।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आपने अक्सर इस बात का डर मन में देखा होगा कि लोग क्या कहेंगे?” ये चार शब्द कई बार इंसान को अपनी इच्छा के अनुसार जिंदगी जीने से भी रोक देते हैं। यूं कहा जाए कि इस बात का डर आपकी आजादी छीन लेता है और आगे बढ़ने के रोकता है।

चाहे करियर की शुरुआत करनी हो या रिश्तों की बात हो, हम अक्सर अपने मन की आवाज से ज्यादा दूसरों की परवाह करते हैं। ये परवाह हमें कई बार भीतर से भी कमजोर बना देती है कई लोग क्या कहेंगे।

अगर आपके मन में भी अपने से ज्यादा दूसरों की फिक्र बनी रहती है, तो श्रीमद्भगवद्गीता का एक श्लोक आपको खुद की राह बनाने और खुद पर भरोसा करने में मदद करेगा। आइए जानें कौन सा है वो श्लोक।

लोगों की परवाह न करें

अगर आपको अपने से ज्यादा इस बात की चिंता सताती है कि 'लोग क्या कहेंगे'? तो गीता का एक श्लोक हमेशा ध्यान में रखें।इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को समझाते कहते हैं -

श्रेयान्स्वधर्मो विगुण: परधर्मात्स्वनुष्ठितात् ।
स्वधर्मे निधनं श्रेय: परधर्मो भयावह: ॥

यह श्लोक गीता के तीसरे अध्याय से लिया गया है और इस श्लोक अर्थ है कि दूसरे के धर्म या कर्तव्य को बहुत अच्छी तरह निभाने से बेहतर है अपने कर्तव्यों के लिए आगे बढ़ना।

भले ही आपमें कुछ कमियां क्यों न हों। अपने धर्म पर टिके रहना ही श्रेष्ठ है, जबकि दूसरे की राह अपनाना आपके लिए भय पैदा करने वाला हो सकता है।

‘लोग क्या कहेंगे’ के डर पर से बचाता है श्लोक

आज के समय में इस श्लोक को केवल धर्म से नहीं बल्कि व्यक्ति की परिस्थितियों से भी जोड़ा जाता है। हर एक व्यक्ति की रुचि और जीवन की यात्रा अलग होती है।

इसलिए किसी दूसरे की सफलता देखकर उसी रास्ते पर चलना जरूरी नहीं है। कई बार हम दूसरों के डर से अपने सपनों को बलिदान कर देते हैं। गीता की यह सीख बताती है कि दूसरों की राह देखकर आपको अपनी दिशा तय करने के बजाय अपनी जिम्मेदारी और स्वभाव को समझना चाहिए।

दूसरों से न करें तुलना

इस श्लोक की एक बड़ी सीख है कि व्यक्ति को कभी दूसरों से अपनी तुलना या दूसरों की नकल नहीं करनी चाहिए। किसी दूसरे व्यक्ति की सफलता देखकर यह मान लेना कि वही रास्ता हमारे लिए भी सही है, जरूरी नहीं।

लोग क्या कहेंगे के डर से बाहर निकलने का यह मतलब नहीं है कि आप दूसरों की अच्छी सलाह को भी नजरअंदाज करें, लेकिन आपको अपने विचारों को भी प्राथमिकता देने की जरूरत है।

जब भी मन में दूसरों की बातों का भय सताए आपको गीता के इस श्लोक का स्मरण करना चाहिए। यह आपको खुद पर भरोसा रखना सिखाएगा।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।