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अनंत चतुर्दशी 2026: आज भगवान विष्णु के किस स्वरूप की होती है आराधना? एक क्लिक में पढ़ें पूजा मुहूर्त और विधि

Published: Fri, 25 Sep 2026 06:30 AM (GMT+05:30)Updated: Fri, 25 Sep 2026 08:15 AM (GMT+05:30)

अनंत चतुर्दशी 2026 में 25 सितंबर को मनाई जाएगी, इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप और शेषनाग की पूजा होती है।

भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा विधि । (Picture Credit- AI Generated)

भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा विधि । (Picture Credit- AI Generated)

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी का विशेष धार्मिक महत्व है। यह दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा और अनंत सूत्र धारण करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और परेशानियों से मुक्ति मिलती है।

साल 2026 में अनंत चतुर्दशी का पर्व 25 सितंबर, शुक्रवार को मनाया जा रहा है। इसी दिन गणेश उत्सव का समापन भी है और श्रद्धालु गणपति बप्पा का विसर्जन भी करेंगे। आइए जानते हैं अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु के किस स्वरूप की पूजा की जाती है, पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है और अनंत सूत्र बांधने की सही विधि क्या है?

कब है अनंत चतुर्दशी 2026?

वर्ष 2026 में अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप और शेषनाग की पूजा की जाती है। पूजा के दौरान 14 गांठों वाला अनंत सूत्र भी भगवान को अर्पित किया जाता है।

भगवान विष्णु के किस स्वरूप की होती है पूजा?

अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु के 'अनंत' स्वरूप की आराधना की जाती है। 'अनंत' का अर्थ है जिसका कोई अंत न हो। इस दिन भगवान विष्णु के विराट और जगतपिता स्वरूप की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्‍यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप के साथ शेषनाग या अनंत नाग का भी पूजन किया जाता है। भगवान विष्णु शेषनाग की शैया पर विराजमान रहते हैं, इसलिए इस दिन शेषनाग को भी पूजा में विशेष स्थान दिया जाता है।

अनंत सूत्र का क्या है महत्व?

अनंत चतुर्दशी की पूजा में 14 गांठों वाले अनंत सूत्र का विशेष महत्व माना जाता है। यह सूती या रेशमी धागे से बनाया जाता है और इसे हल्दी या कुमकुम से रंगकर इसमें 14 गांठें लगाई जाती हैं। इन 14 गांठों को 14 लोकों का प्रतीक माना जाता है। पूजा के दौरान अनंत सूत्र को भगवान विष्णु के सामने रखकर इसकी पूजा की जाती है। पूजा पूरी होने के बाद पुरुष इसे दाहिने हाथ में और महिलाएं बाएं हाथ में धारण करती हैं।

अनंत चतुर्दशी 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त

अनंत चतुर्दशी के दिन पूजा का शुभ समय सुबह 6:11 बजे से रात 11:06 बजे तक बताया गया है। इस दौरान श्रद्धालु अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार भगवान विष्णु की पूजा कर सकते हैं।

अन्य शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4 बजकर 35 मिनट से 5 बजकर 23 मिनट तक

अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 37 मिनट तक

विजय मुहूर्त: दोपहर 2 बजकर 13 मिनट से 3 बजकर 1 मिनट तक

गोधूलि मुहूर्त: शाम 6 बजकर 14 मिनट से 6 बजकर 38 मिनट तक

अनंत चतुर्दशी की पूजा विधि

  • अनंत चतुर्दशी के दिन सुबह उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके भगवान विष्णु की पूजा की तैयारी करें।
  • सबसे पहले लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। इसके बाद चौकी पर कलश स्थापित करें और भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की तस्वीर या प्रतिमा रखें।
  • पूजा शुरू करने से पहले भगवान गणेश का ध्यान करें। आचमन करने के बाद व्रत और पूजा का संकल्प लें। इसके बाद गणेश जी को फूल, अक्षत, धूप और दीप अर्पित करें।
  • भगवान विष्णु को चंदन, रोली, हल्दी और केसर का तिलक लगाएं। इसके बाद पीले फूल, अक्षत, धूप, दीप और तुलसी दल अर्पित करें। पूजा में फलों और मिठाइयों का भोग लगाएं।
  • सूती या रेशमी धागे को हल्दी से रंगकर उसमें 14 गांठें लगाएं। इस अनंत सूत्र को भगवान विष्णु के सामने रखें। भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए अनंत चतुर्दशी की कथा सुनें।
  • पूजा और कथा पूरी होने के बाद अनंत सूत्र धारण करें। सूत्र बांधते समय भगवान विष्णु से सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें।
  • अंत में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें।

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