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क्यों अक्षत के बिना पूरी नहीं होती कोई भी पूजा? पढ़ें भगवान को चावल चढ़ाने के नियम और फायदे

Published: Mon, 08 Jun 2026 08:00 PM (IST)

हिंदू धर्म में पूजा के दौरान अक्षत यानी साबुत चावल चढ़ाने की परंपरा सदियों पुरानी है। जानिए अक्षत का धार्मिक महत्व, पौराणिक मान्यताएं और पूजा में इसका विशेष स्थान।

पूजा में क्यों होता है अक्षत का इस्तेमाल? (AI-Generated)

पूजा में क्यों होता है अक्षत का इस्तेमाल? (AI-Generated)

HighLights

  1. अक्षत का अर्थ है बिना टूटा हुआ चावल

  2. देवताओं को चावल अर्पित करना शुभ माना गया है

  3. अक्षत को देवताओं का प्रिय अन्न माना जाता है

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के दौरान अक्षत यानी साबुत चावल का विशेष महत्व माना गया है। लगभग हर शुभ कार्य, यज्ञ, हवन और धार्मिक अनुष्ठान में अक्षत का प्रयोग किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, अक्षत का अर्थ है "जो खंडित न हो" अर्थात ऐसा चावल जो टूटा हुआ न हो। यही कारण है कि भगवान को हमेशा साबुत चावल ही अर्पित किए जाते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अक्षत समर्पण और पूर्णता का प्रतीक माना जाता है। पूजा में जब किसी सामग्री की कमी रह जाती है, तब उसके स्थान पर अक्षत अर्पित कर उस कमी को पूरा किया जा सकता है। इसी वजह से अक्षत को सभी पूजन सामग्रियों में विशेष स्थान दिया गया है।

ईश्वर को बेहद प्रिय है अक्षत

हिंदू शास्त्रों में अन्न को जीवन का आधार और ईश्वर को प्रसन्न करने का सर्वोत्तम माध्यम बताया गया है। चावल को सबसे शुद्ध अन्न माना जाता है क्योंकि यह धान की परत के भीतर सुरक्षित रहता है और आसानी से अपवित्र नहीं होता। मान्यता है कि प्राचीन काल से ही भगवान को अक्षत अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है, जो आज भी उसी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है।

पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, अक्षत देवताओं को अत्यंत प्रिय है। इसलिए पूजा में भगवान को चावल अर्पित करने से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं। यह भी कहा जाता है कि भगवान को अन्न अर्पित करने से पितरों की भी तृप्ति होती है, जिससे परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।

Akshat puja rules

(AI-Generated Image)

पूजा के दौरान क्यों रखें विशेष ध्यान

पूजा के समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि चढ़ाए जाने वाले चावल टूटे हुए न हों। खंडित अक्षत को शुभ नहीं माना जाता। कई लोग कुमकुम या हल्दी के साथ अक्षत मिलाकर भगवान को अर्पित करते हैं, जिसे विशेष रूप से शुभ माना गया है। मान्यता है कि इससे पूजा का संकल्प जल्दी पूर्ण होता है।

धार्मिक ग्रंथों में यह भी उल्लेख मिलता है कि शिवलिंग पर अक्षत अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। वहीं, माता अन्नपूर्णा की कृपा पाने के लिए भी घर में अक्षत का विशेष महत्व बताया गया है। इसी कारण आज भी हर पूजा और मांगलिक कार्य में अक्षत को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।