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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 24, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Vinayak Chaturthi 2025: भगवान गणेश की पूजा के समय करें इन मंत्रों का जप, दौड़ने लगेगा रुका हुआ कारोबार

    Updated: Tue, 24 Jun 2025 07:00 PM (IST)

    ज्योतिषियों की मानें तो आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर कई मंगलकारी योग बन रहे हैं। इन योग में भगवान गणेश (Ganesh Mantra) की पूजा से मनचाही ...और पढ़ें

    Vinayak Chaturthi 2025: विनायक चतुर्थी का धार्मिक महत्व

    Vinayak Chaturthi 2025: विनायक चतुर्थी का धार्मिक महत्व

    HighLights

    1. भगवान गणेश को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है।

    2. चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है।

    3. भगवान गणेश की पूजा से सौभाग्य में वृद्धि होती है।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, शनिवार 28 जून को आषाढ़ माह की विनायक चतुर्थी है। यह पर्व देवों के देव महादेव के पुत्र भगवान गणेश को समर्पित होता है। इस शुभ अवसर पर भक्ति भाव से भगवान गणेश की पूजा की जाती है। साथ ही मनचाही मुराद पाने के लिए चतुर्थी का व्रत रखा जाता है।

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    धार्मिक मत है कि भगवान गणेश की पूजा करने से आय, सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। साथ ही कारोबार या कारोबार संबंधी परेशानी दूर होती है। साधक चतुर्थी के दिन भक्ति भाव से भगवान गणेश की पूजा करते हैं। अगर आप भी जीवन में व्याप्त परेशानी से निजात पाना चाहते हैं, तो विनायक चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा करें। साथ ही पूजा के समय इन मंत्रों का जप करें।

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    गणेश मंत्र

    1. ऊँ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ ।
    निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा ॥

    2. ऊँ एकदन्ताय विहे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ॥

    3. 'गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बक:।
    नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक :।।
    धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायक:।
    गणपर्तिहस्तिमुखो द्वादशारे यजेद्गणम।।

    4. ॐ वक्रतुण्डैक दंष्ट्राय क्लीं ह्रीं श्रीं गं गणपते वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा।


    5. दन्ताभये चक्रवरौ दधानं, कराग्रगं स्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।
    धृताब्जयालिङ्गितमाब्धि पुत्र्या-लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे॥

    6. ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये वर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नम:।।

    7. “ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं चिरचिर गणपतिवर वर देयं मम वाँछितार्थ कुरु कुरु स्वाहा ।”

    8. गणपतिर्विघ्नराजो लम्बतुण्डो गजाननः ।
    द्वैमातुरश्च हेरम्ब एकदन्तो गणाधिपः ॥
    विनायकश्चारुकर्णः पशुपालो भवात्मजः ।
    द्वादशैतानि नामानि प्रातरुत्थाय यः पठेत्‌ ॥
    विश्वं तस्य भवेद्वश्यं न च विघ्नं भवेत्‌ क्वचित्‌ ।

    9. ॐ श्रीं गं सौभ्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं में वशमानय स्वाहा।

    10. वन्दे गजेन्द्रवदनं वामाङ्कारूढवल्लभाश्लिष्टम् ।
    कुङ्कुमरागशोणं कुवलयिनीजारकोरकापीडम् ॥

    विघ्नान्धकारमित्रं शङ्करपुत्रं सरोजदलनेत्रम् ।
    सिन्दूरारुणगात्रं सिन्धुरवक्त्रं नमाम्यहोरात्रम् ॥

    गलद्दानगण्डं मिलद्भृङ्गषण्डं,
    चलच्चारुशुण्डं जगत्त्राणशौण्डम् ।

    लसद्दन्तकाण्डं विपद्भङ्गचण्डं,
    शिवप्रेमपिण्डं भजे वक्रतुण्डम् ॥

    गणेश्वरमुपास्महे गजमुखं कृपासागरं,
    सुरासुरनमस्कृतं सुरवरं कुमाराग्रजम् ।

    सुपाशसृणिमोदकस्फुटितदन्तहस्तोज्ज्वलं,
    शिवोद्भवमभीष्टदं श्रितततेस्सुसिद्धिप्रदम् ॥

    विघ्नध्वान्तनिवारणैकतरणिर्विघ्नाटवीहव्यवाट्,
    विघ्नव्यालकुलप्रमत्तगरुडो विघ्नेभपञ्चाननः ।

    विघ्नोत्तुङ्गगिरिप्रभेदनपविर्विघ्नाब्धिकुंभोद्भवः,
    विघ्नाघौघघनप्रचण्डपवनो विघ्नेश्वरः पातु नः ॥

    ऋणमुक्ति श्री गणेश स्तोत्र

    ॐ स्मरामि देवदेवेशंवक्रतुण्डं महाबलम्।
    षडक्षरं कृपासिन्धुंनमामि ऋणमुक्तये॥
    महागणपतिं वन्देमहासेतुं महाबलम्।
    एकमेवाद्वितीयं तुनमामि ऋणमुक्तये॥
    एकाक्षरं त्वेकदन्तमेकंब्रह्म सनातनम्।
    महाविघ्नहरं देवंनमामि ऋणमुक्तये॥
    शुक्लाम्बरं शुक्लवर्णंशुक्लगन्धानुलेपनम्।
    सर्वशुक्लमयं देवंनमामि ऋणमुक्तये॥
    रक्ताम्बरं रक्तवर्णंरक्तगन्धानुलेपनम्।
    रक्तपुष्पैः पूज्यमानंनमामि ऋणमुक्तये॥
    कृष्णाम्बरं कृष्णवर्णंकृष्णगन्धानुलेपनम्।
    कृष्णयज्ञोपवीतं चनमामि ऋणमुक्तये॥
    पीताम्बरं पीतवर्णपीतगन्धानुलेपनम्।
    पीतपुष्पैः पूज्यमानंनमामि ऋणमुक्तये॥
    सर्वात्मकं सर्ववर्णंसर्वगन्धानुलेपनम्।
    सर्वपुष्पैः पूज्यमानंनमामि ऋणमुक्तये॥
    एतद् ऋणहरं स्तोत्रंत्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः।
    षण्मासाभ्यन्तरे तस्यऋणच्छेदो न संशयः॥
    सहस्रदशकं कृत्वाऋणमुक्तो धनी भवेत्॥

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