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हलषष्ठी : 2 सितंबर को है 'हलछठ', इन 2 मुहूर्तों पर पूजा करने से बढ़ेगी संतान की आयु

Published: Tue, 01 Sep 2026 02:28 PM (IST)

संतान के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु के लिए हलषष्ठी का व्रत 2 सितंबर 2026 को रखा जाएगा। इस दिन ...और पढ़ें

हलषष्ठी 2026 संतान की लंबी आयु के लिए करें पूजा।  (Picture Credit- AI Generated)

हलषष्ठी 2026 संतान की लंबी आयु के लिए करें पूजा। (Picture Credit- AI Generated)

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में संतान के अच्‍छे स्‍वास्‍थ्‍य और लंबी आयु के लिए कई व्रत रखे जाते हैं। इनमें से एक हलषष्‍ठी का व्रत 2 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। यह त्‍योहार हर वर्ष भाद्रपद माह के कृष्‍ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है।

इस दिन को कई तरह के नामों से पुकारा जाता है, जिनमें हरषठ, हलषठ, ललही छठ, चंदन छठ, खमर छठ आदि नाम बहुत ज्यादा लोकप्रिय हैं। इस दिन माताएं अपनी संतान के लिए व्रत रखती है। यह व्रत काफी विशेष होता है और अन्‍य व्रतों से बहुत अलग भी होता है। यदि इस दिन शुभ मुहूर्त पर पूजा की जाए तो इसके विशेष फल प्राप्‍त होते हैं।

चलिए जानते हैं कि हलषष्‍ठी के दिन पूजा का क्‍या महत्‍व है और पूजा का शुभ मुहूर्त क्‍या है।

हलषष्‍ठी का महत्‍व?

हलषष्ठी का व्रत भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई भगवान बलराम को समर्पित है। इस दिन भगवान बलराम का जन्मोत्सव होता है और इस दिन महिलाएं संतान प्राप्ति और संतान के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं।

इस व्रत में हल से जोती गई फसल से उपजी चीजें नहीं खाई जाती हैं। इसका कारण है कि हल बलराम जी का शस्‍त्र है। इस दिन जो महिलाएं व्रत रखती हैं, वे केवल पानी में बोई गई चीजें ही खा सकती हैं। साथ ही इस दिन गाय के दूध से बनी चीजें भी भी खाना वर्जित होता है क्‍योंकि मान्‍यता है कि इस दिन गाय का दूध केवल उसके बछड़े के लिए होता है । इस दिन महुआ खाने का भी विशेष महत्‍व बताया गया है।

हलषष्‍ठी की पूजा का शुभ मुहूर्त

हलषष्‍ठी का आरंभ: 2 सितंबर 2026 को सुबह 6 बजकर 12 मिनट पर षष्‍ठी तिथि की शुरुआत होगी।

हलषष्‍ठी की समाप्ति : 3 सितंबर 2026 को सुबह 4 बजकर 25 मिनट पर षष्‍ठी तिथि समाप्‍त होगी।

पूजा के लिए सबसे अच्‍छा मुहूर्त: 6 बजकर 12 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 10 मिनट तक आप पूजा कर सकते हैं। हालांकि, इस व्रत की पूजा के लिए सबसे अच्छा अभिजीत मुहूर्त होगा, जो 12 बजकर 14 मिनट पर शुरू होगा और 1 बजकर 5 मिनट तक रहेगा।

जरूर करें ये काम

हलषष्‍ठी के दिन चंदन को घिसकर उसका टीका जरूर लगाएं। मान्‍यता है कि ऐसा करने से सकारात्‍मक ऊर्जा का शरीर में वास होता है। इस दिन शिव परिवार और नंदीगण की भी पूजा करनी चाहिए। इस दिन चंद्रदेव को अर्घ्‍यदान करने का भी महत्‍व है। मान्‍यता है कि चंद्रदेव को अर्घ्‍य देने के बाद भी व्रत को पूर्ण माना जाता है।

अत: यह पर्व संतान की प्राप्ति और उसकी रक्षा के लिए मनाया जाता है। इस दिन भगवान बलराम की पूजा करके अपनी संतान की लंबी आयु का आशीर्वाद आप प्राप्‍त कर सकते हैं।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है