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    मंगलवार को करें 'संकटमोचन हनुमानाष्टक' का पाठ, जीवन से कोसों दूर रहेंगे ये 5 बड़े संकट

    Updated: Tue, 21 Apr 2026 06:20 AM (GMT+05:30)

    आज मंगलवार को हनुमान जी की पूजा में 'संकटमोचन हनुमानाष्टक' का पाठ करने से जीवन की हर बाधा दूर होती है। जानें गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित इस अद्भु ...और पढ़ें

    संकटमोचन हनुमानाष्टक (Image Source: Ai-Generated)

    संकटमोचन हनुमानाष्टक (Image Source: Ai-Generated)

    HighLights

    1. मंगलवार का दिन संकटमोचन को समर्पित है

    2. इस दिन हनुमानाष्टक के पाठ से मानसिक शांति मिलती है

    3. इसकी रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने की है

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आज मंगलवार है, जो संकटमोचन हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त करने का सबसे पावन दिन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन पूरी श्रद्धा के साथ बजरंगबली की पूजा करने से भक्तों के सभी कष्ट और बाधाएं समाप्त हो जाती हैं। आज के दिन स्नान के पश्चात हनुमान जी को सिंदूर का चोला, चमेली का तेल, लाल फूल और लड्डू अर्पित करने का विधान है।

    पूजा के दौरान गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित 'संकटमोचन हनुमानाष्टक' का पाठ करना अत्यंत प्रभावशाली माना गया है, जो न केवल मन को शांति प्रदान करता है बल्कि भक्त के संकल्पों को सिद्ध करने में भी सहायक होता है।

    हनुमानाष्टक के पाठ से मिलने वाले लाभ अनगिनत हैं, लेकिन मुख्य रूप से इसके पांच बड़े फायदे बताए गए हैं। मंगलवार को इसका पाठ करने से कार्यक्षेत्र में सफलता मिलती है और जीवन के समस्त दुखों का अंत होता है। यह पाठ न केवल आने वाले अनचाहे संकटों को टाल देता है, बल्कि व्यक्ति के भीतर से हर प्रकार के भय (डर) को निकाल बाहर करता है।

    Hanuman ji (1)

    (Image Source: AI-Generated)

    संकटमोचन हनुमानाष्टक

    बाल समय रवि भक्षी लियो तब, तीनहुं लोक भयो अंधियारों।
    ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो।

    देवन आनि करी बिनती तब, छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो।
    को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥

    बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि, जात महाप्रभु पंथ निहारो।
    चौंकि महामुनि साप दियो तब, चाहिए कौन बिचार बिचारो।।

    कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु, सो तुम दास के सोक निवारो।
    अंगद के संग लेन गए सिय, खोज कपीस यह बैन उचारो।।

    जीवत ना बचिहौ हम सो जु, बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो।
    हेरी थके तट सिन्धु सबे तब, लाए सिया-सुधि प्राण उबारो ॥

    रावण त्रास दई सिय को सब, राक्षसी सों कही सोक निवारो।
    ताहि समय हनुमान महाप्रभु, जाए महा रजनीचर मरो।।

    चाहत सीय असोक सों आगि सु, दै प्रभुमुद्रिका सोक निवारो।
    बान लाग्यो उर लछिमन के तब, प्राण तजे सूत रावन मारो।।

    लै गृह बैद्य सुषेन समेत, तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो।
    आनि सजीवन हाथ दिए तब, लछिमन के तुम प्रान उबारो।।

    रावन जुध अजान कियो तब, नाग कि फाँस सबै सिर डारो।
    श्रीरघुनाथ समेत सबै दल, मोह भयो यह संकट भारो।।

    आनि खगेस तबै हनुमान जु, बंधन काटि सुत्रास निवारो।
    बंधू समेत जबै अहिरावन, लै रघुनाथ पताल सिधारो।।

    देबिन्हीं पूजि भलि विधि सों बलि, देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो।
    जाये सहाए भयो तब ही, अहिरावन सैन्य समेत संहारो।।

    काज किये बड़ देवन के तुम, बीर महाप्रभु देखि बिचारो।
    कौन सो संकट मोर गरीब को, जो तुमसे नहिं जात है टारो।
    बेगि हरो हनुमान महाप्रभु, जो कछु संकट होए हमारो।।

    दोहा

    लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर।
    वज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर॥

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।

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