मां दुर्गा की आरती: जय अम्बे गौरी मैय्या जय श्यामा... पढ़ें संपूर्ण आरती हिंदी में
मां दुर्गा की प्रसिद्ध आरती “जय अंबे गौरी” के पूरे बोल यहां हिंदी में पढ़ें। अर्थ सहित और जानें इस आरती का धार्मिक महत्व।

जय अम्बे गौरी आरती हिंदी लिरिक्स
HighLights
उत्तर भारत में लोकप्रिय 'जय अम्बे गौरी' आरती।
नवरात्रि, दुर्गा पूजा में इसका विशेष महत्व।
नकारात्मक शक्तियों से बचाव, मानसिक शक्ति में वृद्धि।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। उत्तर भारत में जब मां दुर्गा या उनके स्वरूपों की आरती की जाती है, मुख्य रूप से 'जय अम्बे गौरी' देवी के सबसे ज्यादा प्रिय भजनों में शामिल है। नवरात्रि, दुर्गाष्टमी और दुर्गा पूजा के दौरान देश भर के अनगिनत मंदिरों में संध्या आरती के दौरान मां के इस भजन को आरती के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
जय अम्बे गौरी आरती के गीत (हिंदी में लिरिक्स)
ऊं जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥
ऊं जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी।
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥
ऊं जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती॥
शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥
ऊं जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥
ऊं जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों।
बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू॥
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता॥
ऊं जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती॥
ऊं जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे॥
ऊं जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
जब अम्बे गौरी आरती करने के लाभ
देवी दुर्गा की इस आरती का पाठ करने से उनकी कृपा की प्राप्ति होती है , जो भक्तों को नकारात्मक शक्तियों और विपत्तियों से बचाती है।
इस आरती का रोजाना पाठ करने से आंतरिक साहस और मानसिक शक्ति में वृद्धि होती है, जो देवी के आशीर्वाद का प्रतीक है।
जो भी व्यक्ति नियमित रूप से जय अम्बे गौरी का पाठ करता है, उसके जीवन में हमेशा सुख-शांति और सामंजस्य बना रहता है।
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