शिवलिंग की नहीं, शिव जी के पैर के अंगूठे की होती है पूजा, जानिए अचलेश्वर महादेव मंदिर का अद्भुत रहस्य
राजस्थान के अचलेश्वर महादेव मंदिर में शिवलिंग की बजाय भगवान शिव के दाहिने पैर के अंगूठे की पूजा होती है। यह अनोखी परंपरा अर्बुद सर्प के अहंकार को तोड़ ...और पढ़ें

अचलेश्वर महादेव मंदिर का रहस्य

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैसे तो देश में भगवान शिव को समर्पित कई मंदिर स्थित हैं, लेकिन राजस्थान में एक ऐसा मंदिर है, जो चमत्कारिक और अद्भुत है। आपको जानकर इस बात की हैरानी होगी कि इस मंदिर में भगवान शिव की नहीं, बल्कि महादेव के दाहिने पैर के अंगूठे की विशेष पूजा-अर्चना होती है।
इस मंदिर का नाम अचलेश्वर महादेव मंदिर है। इसी रहस्य की वजह से मंदिर अधिक प्रसिद्ध है। मंदिर में साधना करने के लिए भक्त दूर-दूर से आते हैं। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं अचलेश्वर महादेव मंदिर का रहस्य और इससे जुड़ी खास बातों के बारे में।
क्यों होती है शिव जी के पैर के अंगूठे की पूजा?
धार्मिक के अनुसार, अचलगढ़ में विशाल ब्रह्म खाई थी। इस खाई में एक ऋषि की गाय गिर गयी थी, जिससे ऋषि ने परेशान होकर देवताओं से खाई को पाटने के लिए गुहार लगाई, जिससे गायों के गिरने से बचाया जा सके।
इसके बाद ऋषि की गुहार पर देवताओं ने ब्रह्म खाई को पाटने के लिए कहा, जिसे अर्बुद नामक सर्प ने अपनी पीठ पर उठाया था। अर्बुद सांप को इस बात का अहंकार हो गया था कि उसने अपनी शक्ति के द्वारा पर्वत को उठा लिया। इसलिए अर्बुद सांप हिलने लगा, जिसकी वजह से पर्वत पर कंपन शुरू हो गया।
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इस दौरान भगववान शिव ने दाहिने पैर के अंगूठे से पर्वत को स्थिर किया, जिसके बाद अर्बुद सर्प का घमंड चकनाचूर हुआ। मान्यता के अनुसार, तभी से यहां पर भगवान शिव के अंगूठे की पूजा-अर्चना की जाती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस मंदिर में शिव के दाहिने पैर का अंगूठे की प्रतिमा है।
अचलेश्वर महादेव मंदिर की विशेषताएं
इस मंदिर में एक छोटा सा प्राकृतिक गड्ढा बना हुआ है। यहां आने वाले हर श्रद्धालु जल चढ़ता है, लेकिन जल से कभी भी गड्ढा भरता नहीं है। मंदिर के मुख्य द्वार पर एक नंदी की मूर्ति बनी हुई है। यह मूर्ति पांच धातुओं से मिलकर बनी हुई है।
इस मंदिर में महाशिवरात्रि और सावन के महीने पवित्र मंदिर में भक्तों को भारी भीड़ देखने को मिलती है। इस दौरान मंदिर में नजारा बेहद भव्य होता है।
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