कुएं से प्रकट हुए थे बप्पा, दूर हुई थी 3 भाइयों की विकलांगता, जानिए कनिपकम वरसिद्धि विनायक मंदिर का रहस्य
आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में स्थित कनिपकम वरसिद्धि विनायक मंदिर अपनी स्वयंभू गणेश प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है, जिसके ...और पढ़ें

बेहद खास है कनिपकम वरसिद्धि विनायक मंदिर

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi 2026) एक प्रमुख पर्व है। यह पर्व भगवान गणेश को समर्पित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर गणेश चतुर्थी को गणपति बप्पा के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर गणेश जी की पूजा-अर्चना करने का अधिक महत्व है।
इस अवसर पर भक्त गणपति बप्पा के दर्शन करने के लिए मंदिर जाते हैं। इस दौरान मंदिरों में खास रौनक देखने को मिलती है। वैसे तो देश में भगवान गणेश को समर्पित कई मंदिर हैं, जो किसी न किसी रहस्य की वजह से प्रसिद्ध हैं। इन्हीं मंदिरों में आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में स्थित कनिपकम वरसिद्धि विनायक मंदिर (Kanipakam Varasiddhi Vinayaka Temple) भी शामिल है। यहां स्वयंभू श्री वरसिद्धि विनायक की प्रतिमा विराजमान है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस मंदिर में समय के साथ श्री वरसिद्धि विनायक की प्रतिमा का आकार बढ़ रहा है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं इस मंदिर से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी।
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(Picture Courtesy: Instagram)
मंदिर से जुड़ी कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, तीन भाई थे जो मूक, बधिर और नेत्रहीन थे। वे तीनों भाई अपने खेत में जल को लाने के लिए कुएं की खुदाई कर रहे थे। खुदाई करते समय उनके औजार से कोई कठोर चीज टकराई और कुएं से रक्त प्रवाहित होने लगा। उसी समय वे तीनों भाई अपनी-अपनी विकलांगता से मुक्त हो गए। जब इस बात की जानकारी मिलने पर गांव के लोग कुएं के पास पहुंचे, तो उनको कुएं में भगवान गणेश की मूर्ति मिली। इसके बाद लोगों में कुएं के जल को प्रसाद के रूप में वितरित किया गया।
गणेश चतुर्थी पर होती है विशेष पूजा
दक्षिण भारत का यह मंदिर श्रद्धालुओं के बीच आस्था का केंद्र बना हुआ है। गणेश चतुर्थी के अवसर पर मंदिर में भगवान गणेश की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इसके अलावा यहां पर वार्षिक ब्रह्मोत्सव का आयोजन भी किया जाता है। इस उत्सव के दौरान कई अनुष्ठान और उत्सव आयोजित किए जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्री वरसिद्धि विनायक जी के दर्शन और पूजा-अर्चना करने से जीवन में शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं और गणपति बप्पा भक्त की सभी मुरादें पूरी करते हैं।
मंदिर का इतिहास
ऐसा बताया जाता है कि कनिपकम वरसिद्धि विनायक मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में चोल सम्राट कुलोत्तुंग प्रथम ने कराया था, जिसके बाद वर्ष 1336 में विजयनगर साम्राज्य ने इस मंदिर का विस्तार किया।
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source- chittoor.ap.gov.in
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