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    धारी देवी मंदिर: सुबह कन्या, दोपहर में युवती और शाम को वृद्ध, यहां दिन में 3 बार रूप बदलती है मूर्ति

    Updated: Sat, 09 May 2026 11:20 AM (IST)

    उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में स्थित धारी देवी मंदिर देवी काली को समर्पित एक प्राचीन और रहस्यमयी स्थल है, जिन्हें चार धाम का रक्षक भी माना जाता है। ...और पढ़ें

    धारी देवी मंदिर की खासियत (Picture Credit- AI Generated)

    धारी देवी मंदिर की खासियत (Picture Credit- AI Generated)

    HighLights

    1. अलकनंदा नदी किनारे स्थित है धारी देवी मंदिर

    2. देवी की मूर्ति दिन में तीन बदलती है अपना बार रूप

    3. देवी को माना जाता है मंदिर चार धाम का रक्षक

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। धारी देवी मंदिर, मुख्य रूप से देवी काली को समर्पित मंदिर है, जो इस क्षेत्र में पूजनीय होने के साथ-साथ भारत के अन्य हिस्सों में भी ख्याति प्राप्त कर रहा है। धारी देवी मंदिर को 4 धाम का रक्षक भी कहा जाता है। चलिए जानते हैं इस मंदिर से जुड़ी और भी कई खास बातें, जो आपको देवी के दर्शन के लिए मजबूर कर देंगी।

    कहां स्थित है मंदिर

    उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में श्रीनगर और रुद्रप्रयाग के बीच कलियासौड़ में अलकनंदा नदी के किनारे धारी देवी मंदिर स्थित है। यह एक प्राचीन और रहस्यमयी मंदिर माना जाता है। धारी माता को देवी कालीसौर के रूप में भी जाना जाता है, जिनका आशीर्वाद पाने के लिए दूर-दूर के लोग इस पवित्र मंदिर के दर्शन करने आते रहे हैं। मंदिर के पास एक प्राचीन गुफा भी मौजूद है।

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    तीन बार रूप बदलती है मूर्ति

    लोगों का मानना है कि मंदिर में स्थित धारी माता की मूर्ति एक दिन में तीन बार अपना रूप बदलती हैं। सुबह के समय वह एक छोटी बालिका के रूप में नजर आती हैं, दिन में उनका स्वरूप एक महिला की तरह नजर आता है और अंत में यानी शाम के समय वह एक बूढ़ी महिला के रूप में दिखाई देती हैं।

    क्यों प्रसिद्ध है मंदिर

    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कि एक बार भीषण बाढ़ से एक मंदिर बह गया और धारी देवी की मूर्ति धारो गांव के पास एक चट्टान के रुक गई थी। गांव वालों ने मूर्ति से विलाप की आवाज सुनाई सुनी और इस आवाज ने उन्हें मूर्ति स्थापित करने का निर्देश दिया। तब गांवों वालो ने मिलकर पुनः उसी स्थान पर माता की मूर्ति को स्थापित कर दिया।

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    अन्य प्रचलित मान्यता के अनुसार, 2013 की केदारनाथ बाढ़ से ठीक पहले किसी काम के चलते मंदिर को स्थानांतरित किया गया था। स्थानीय लोगों का मानना है कि देवी के प्रकोप के कारण ही बाढ़ आई थी। बाद में उसी जगह पर फिर से मंदिर का निर्माण कराया गया और देवी की मूर्ति को स्थापित किया गया। इसलिए इस मंदिर की मान्यता इतनी अधिक है।

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    (Picture Credit- AI Generated)

    मंदिर की खासियत

    • धारी देवी मंदिर में देवी को 'उत्तराखंड की रक्षक देवी' और चारधामों की संरक्षक के रूप में पूजा जाता है।
    • इस मंदिर को 108 शक्ति स्थलों में से एक माना जाता है।
    • देवी धारी की मूर्ति का केवल ऊपरी आधा भाग (सिर) यहां पूजनीय है, जबकि निचला हिस्सा रुद्रप्रयाग के कालीमठ में पूजा जाता है।
    • बिना धारी माता के दर्शन किए चार धाम की यात्रा अधूरी मानी जाती है।
    • हर साल नवरात्रों के अवसर पर देवी कालीसौर को विशेष पूजा की जाती है।

    Sourcs - उत्तराखंड शासन

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