शादी के बाद हर कपल को जरूर करनी चाहिए ये 4 पवित्र तीर्थ यात्राएं
शादीशुदा जोड़ों के लिए चार पवित्र तीर्थ यात्रा, जो उनके रिश्ते को मजबूत करने और दैवीय आशीर्वाद प्राप्त करने में सहायक हैं।
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जोड़ों के लिए पवित्र तीर्थयात्रा (Picture Credits- AI Images)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शादी के बाद 4 पवित्र तीर्थ यात्राएं हैं, जो हर शादीशुदा जोड़े को एक साथ जरूर करनी चाहिए, ताकि दैवीय आशीर्वाद मिल सके और रिश्ता मजबूत हो सके। विवाह सिर्फ एक सामाजिक बंधन ही नहीं, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में एक दिव्य बंधन का प्रतीक भी है।
इस पवित्र रिश्ते को मजबूत करने के लिए प्राचीन ऋषियों ने कुछ तीर्थयात्राओं का विधान भी बताया है, जो वैवाहिक संबंध को मजबूत करने के साथ शुद्ध, और बेहतर बनाती हैं। आइए इन चार पवित्र यात्राओं का अध्ययन करें जो हर विवाहित जोड़े को एक साथ जरूर ही करनी चाहिए।
गोवर्ध पर्वत की परिक्रमा
हर शादीशुदा जोड़े को शादी के बाद सबसे पहले गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा जरूर करनी चाहिए। मथुरा के ब्रज क्षेत्र में स्थित गोवर्धन पर्वत की कुल परिक्रमा यात्रा 21 किलोमीटर की है। यह पर्वत कोई साधारण चट्टान नहीं, बल्कि इसे भगवान कृष्ण के स्वरूप के रूप में पूजा जाता है। भगवान श्रीकृष्ण ने ग्रामीणों को इंद्र देवता के प्रकोप से बचाने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी सी उंगली पर उठा लिया था।
विवाहित जोड़े के लिए यह यात्रा सिर्प एक शारीरिक यात्रा से कहीं बढ़कर है। यह यात्रा एकता और सेवा की प्रतिज्ञा बन जाती है। जब दंपति पवित्र मार्ग पर नंगे पैर चलता है, तो उनके रिश्ते को भगवान कृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
चित्रकूट में कामदगिरी पर्वत की परिक्रमा
चित्रकूट कई तरह के चमत्कारों की भूमि है, जहां भगवान श्रीराम, सीता और लक्ष्मण ने अपने वनवास का एक जरूरी हिस्सा बिताया था। कामदगिरी परिक्रमा 5 किलोमीटर का एक चक्र है, जिसे भक्त श्रद्धापूर्वक राम नाम के जाप के साथ पूरा करते हैं।
ऐसा माना जाता है कि जो दंपत्ति यह परिक्रमा एक साथ करते हैं, उन्हें वैवाहिक सामंजस्य, धार्मिक जीवन और सीता-राम की तरह कठिनाइयों को सहने की शक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

विंध्याचल में मां विंध्यावासिनी के दर्शन
शादी शुदा जोड़ों के लिए तीसरा तीर्थ स्थल शक्तिशाली विंध्याचल पर्वत, जहां मां दुर्गा के उग्र रूप माता विंध्यवासिनी की पूजा की जाती है। मां को इच्छापूर्ति माता के रूप में भी पूजा जाता है। नवविवाहित जोड़े जब मां विंध्यवासिनी के दर्शन करते हैं तो उन्हें शक्ति, समृद्धि, संतानोत्पत्ति और दिव्य सुरक्षा का आशीर्वाद मिलता है। कहा जाता है कि, मां विंध्यावासिनी के दर्शन से ये सभी इच्छाएं पूरी हो जाती है।
दंपति अक्सर यहां संतान की सेहत, घरेलू सुख और बाधाओं से मुक्ति पाने के लिए अनुष्ठान करते हैं। लेकिन इन वरदानों के अलावा उन्हें जो मिलता है वह एक जागृति है।
भगवान मल्लिकार्जुन की तीर्थयात्रा
चौथी और सबसे जरूरी आध्यात्मिक तीर्थ यात्रा भगवान मल्लिकार्जुन की है, जो आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम में स्थित भगवान शिव से जुड़ा ज्योतिर्लिंग है। कई मंदिरों के विपरीत जहां भगवान शिव अकेले विराजमान होते हैं, वहीं इस मंदिर में शिव के साथ शक्ति देवी भ्रमरम्बा भी निवास करती हैं। यह मंदिर दिव्य युगल पुरुष और प्रकृति के पूर्ण संतुलन का प्रतीक माना जाता है।
मल्लिकार्जुन के दर्शन करने वाले दंपत्ति को सिर्फ यहां शिव का ही आशीर्वाद नहीं मिलता, बल्कि शिव और शक्ति दोनों का आशीर्वाद मिलता है। श्रीशैलम की यात्रा काफी मुश्किल है, जिसमें अक्सर जंगलों और खड़ी पहाड़ियों से होकर गुजरना पड़ता है, लेकिन गंतव्य काफी अलौकिक है।
पति-पत्नी ज्योतिर्लिंग और देवी के सामने नतमस्तक होते हुए सिर्फ एक अनुष्ठान ही नहीं करते बल्कि वे अपने मिलन को सबसे दिव्य और पवित्र कर रहे होते हैं। ऐसा माना जाता है कि, मल्लिकार्जुन के दर्शन करने से वैवाहिक कलश की समस्या खत्म होते ही और जीवन में पति-पत्नी के बीच हमेशा प्रेम बना रहता है।
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