क्या आप भी कर रहे हैं पुत्रदा एकादशी का व्रत? पारण से पहले जरूर पढ़ें ये खास नियम
सावन पुत्रदा एकादशी 2026 व्रत के पारण के नियम और शुभ मुहूर्त के बारे में बताया गया है। व्रत का ...और पढ़ें

सावन पुत्रदा एकादशी व्रत पारण की विधि (AI-Generated Image)

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर पुत्रदा एकादशी (Putrada Ekadashi 2026) व्रत किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही विधिपूर्वक व्रत भी किया जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को सच्चे मन से करने से साधक को सभी पापों से छुटकारा मिलता है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
पुत्रदा एकादशी व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है, जब इसका पारण सही समय पर किया जाए। ऐसा माना जाता है कि व्रत का पारण न करने से शुभ फल की प्राप्ति नहीं होती है और व्रत अधूरा माना जाता है। इसलिए द्वादशी तिथि पर व्रत का पारण जरूर करें। आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि पुत्रदा एकादशी व्रत का पारण कब और कैसे करें।
पुत्रदा एकादशी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त (Putrada Ekadashi 2026 Date and Shubh Muhurat)
वैदिक पंचांग के अनुसार, 23 अगस्त को पुत्रदा एकादशी का व्रत किया जाएगा और 24 अगस्त को वैष्णवजन पुत्रदा एकादशी मनाएंगे।
सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत- 23 अगस्त को देर रात 02 बजे से।
सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का समापन- 24 अगस्त को सुबह 04 बजकर 18 मिनट पर।
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पुत्रदा एकादशी व्रत पारण का समय (Putrada Ekadashi Vrat Paran Time)
इस बार पुत्रदा एकादशी का पारण 24 अगस्त को किया जाएगा। इस दिन व्रत का पारण करने का शुभ मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 41 मिनट से लेकर शाम 04 बजकर 16 मिनट तक है। इस अवधि के दौरान किसी भी समय व्रत का पारण किया जा सकता है।
पुत्रदा एकादशी व्रत की पारण विधि
- द्वादशी तिथि के दिन स्नान करने के बाद सबसे पहले सूर्य देव को अर्घ्य दें।
- मंदिर की सफाई करने के बाद गंगाजल छिड़ककर उसे शुद्ध करें।
- भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं।
- प्रभु को फूल, फल, नैवेद्य और तुलसी दल अर्पित करें।
- आरती करें और मंत्रों का जप करें।
- व्रत के दौरान हुई किसी भी जाने-अनजाने भूल के लिए प्रभु से क्षमा मांगें।
- पारण करने से पहले किसी मंदिर में या गरीब लोगों को आटा, दाल और चावल आदि का दान करें।
- अंत में भगवान को लगाए गए भोग और प्रसाद को ग्रहण कर अपना व्रत खोलें।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
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