Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    पद्मिनी एकादशी की ये कथा बदल देगी किस्मत, सूनी गोद भरेगी और बनेंगे बिगड़े काम

    Updated: Wed, 27 May 2026 08:17 AM (GMT+05:30)

    ज्येष्ठ अधिक मास की पद्मिनी एकादशी 27 मई को मनाई जा रही है। इस दिन व्रत कथा का पाठ करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और संतान सुख सहित सभी बिगड़े ...और पढ़ें

    कथा के बिना अधूरा है व्रत (Picture Credit- AI Generated)

    कथा के बिना अधूरा है व्रत (Picture Credit- AI Generated)

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर पद्मिनी एकादशी मनाई जाती है। इस बार यह व्रत आज यानी 27 मई को किया जा रहा है। यह दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए शुभ माना जाता है।
    इस व्रत को करने से साधक के जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और भगवान विष्णु की कृपा से बिगड़े काम पूरे होते हैं। इस दिन पूजा के दौरान व्रत कथा का पाठ जरूर करना चाहिए। इससे साधक को व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है और श्री हरि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। आइए पढ़ते हैं पद्मिनी एकादशी व्रत कथा।

    पद्मिनी एकादशी व्रत कथा

    पौराणिक कथा के अनुसार, त्रेतायुग में महिष्मती पुरी के राजा कृतवीर्य थे। उनकी एक हजार पत्नियां थीं, लेकिन किसी भी पत्नी को संतान सुख प्राप्त नहीं हुआ। इसलिए उत्तराधिकारी न होने की वजह से राजा दुखी रहने लगे। जब सभी संतान प्राप्ति के सभी उपाय विफल हो गए, तो ऐसे में राजा ने राज-काज और पदभार मंत्रियों को सौंप दिया।

    राजा कृतवीर्य ने क्यों वर्षों तक की तपस्या

    इसके बाद राजा कृतवीर्य ने योगी का वेश धारण किया और पतिव्रता रानी पद्मिनी के संग गंधमादन पर्वत पर तपस्या करने लगे। गंधमादन पर्वत पर राजा ने 10 हजार वर्षों तक घोर तपस्या की। इसके बाद भी राजा को पुत्र रत्न की प्राप्ति नहीं हुई।

    पद्मिनी और माता अनुसूया की हुई मुलाकात

    इस दौरान पद्मिनी और माता अनुसूया की मुलाकात हुई। देवी अनुसूया ने पद्मिनी को अधिक मास के महत्व के बारे में बताया। यह एकादशी 3 साल में एक बार आती है। उन्होंने पद्मिनी को अधिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी व्रत करने की सलाह दी।

    खबरें और भी

    पद्मिनी ने किया एकादशी का व्रत

    पद्मिनी ने इस व्रत को विधिपूर्वक किया और भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की। श्री हरि विष्णु व्रत से प्रसन्न हुए और उन्होंने रानी को एक बलशाली पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया। रानी ने पुत्र का नाम कार्तवीर्य रखा गया।

    पद्मिनी एकादशी का धार्मिक महत्व

    धार्मिक मान्यता के अनुसार, पद्मिनी एकादशी का विधिपूर्वक व्रत करने से साधक को जन्म-जन्मांतर के जाने-अनजाने में किए पापों से छुटकारा मिलता है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही यह व्रत जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाता है।

    यह भी पढ़ें- पद्मिनी एकादशी पर बन रहा सर्वार्थ सिद्धि योग, इस मुहूर्त में पूजा करने से हर अधूरी मनोकामना होगी पूरी!

    यह भी पढ़ें- पद्मिनी एकादशी पर राशि अनुसार श्री हरि को अर्पित करें ये चीजें, रातों-रात चमक उठेगा सोया भाग्य

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।