जालंधर के स्कूल में दो बच्चों के बीच खूनी संघर्ष, छात्र ने कुर्सी से किया हमला; पेट में लगे 22 टांके
जालंधर के ट्विंकल मॉडल स्कूल में बेंच पर बैठने को लेकर हुए झगड़े में एक छात्र को कुर्सी से मारा ...और पढ़ें

बेंच पर बैठने को लेकर दो बच्चों में हुई लड़ाई, पेट में लगे 22 टांके लगे।
HighLights
बेंच पर बैठने को लेकर छात्रों में हुई लड़ाई
एक छात्र को कुर्सी से मारा, पेट में 22 टांके
घायल छात्र के परिजनों ने स्कूल पर लगाया आरोप
जागरण संवाददाता, जालंधर। ट्विंकल मॉडल स्कूल दो बच्चों में 2 दिन पहले बेंच पर बैठने को लेकर लड़ाई हो गई थी। इस दौरान एक बच्चे ने दूसरे को कुर्सी उठाकर मार दी जिस वजह से उसके पेट पर 22 टांके लगे हैं।
घायल बच्चे के ताया जसवीर सिंह और मासी सिमरन ने कहा कि उनका बच्चा आकाशदीप दसवीं कक्षा में पड़ता है। स्कूल में एक ही कक्षा में दसवीं और नवमी कक्षा पढ़ाई जाती है।
उनके बच्चे को सुबह जल्दी बुलाया जाता है और वह सुबह जल्दी आकर कक्षा के बेंच ठीक करता है, ऐसे में आकाशदीप दो दिन पहले कक्षा के बेंच ठीक कर रहा था तभी नवमी कक्षा के एक छात्रा ने उसे बहसबाजी शुरू कर दी कि वह इस बेंच पर बैठेगा जबकि वह बेंच अतिरिक्त था। इसी बात को लेकर उसके बच्चे को पहले चेहरे और बाद में कुर्सी उठाकर उसके पेट में मारी गई।
उनका आरोप है कि वे उन्हें सपोर्ट नहीं कर रहे हैं। क्योंकि उनके बच्चे की हालत ज्यादा खराब है। उसकी सर्जरी हुई है और वह सेक्रेड हार्ट अस्पताल में है। जहां डॉक्टरों ने अभी भी उसकी हालत खराब ही बताई है। उनकी स्कूल प्रशासन से यही मांग है कि वह उन्हें सपोर्ट करें ताकि बच्चे का इलाज अच्छी तरह से हो।
हालांकि, जब उनके बच्चे को अस्पताल में दाखिल करवाया जा रहा था। तब अस्पताल की तरफ से पहले पुलिस कंप्लेंट दाखिल करने के लिए कहा गया था। पर स्कूल प्रबंधन की तरफ से पुलिस कंप्लेंट ना करके इलाज का सारा खर्च उठाने की बात कही थी। अब उन्हें यह कहा जा रहा है कि दूसरे बच्चे के पेरेंट्स करेंगे।
इसके संबंध में ही वे वीरवार को स्कूल में बात करने आए थे कि उन्हें इसके बारे में नहीं पता आकाशदीप के इलाज का खर्च स्कूल करें या फिर दूसरे बच्चे के पेरेंट्स । उन्हें बस उनका बच्चा सुरक्षित चाहिए। पर स्कूल प्रबंधकों ने उनकी स्पोर्ट करने से मना कर दिया।
दूसरी तरफ स्कूल की शिक्षिका मीरा सेठी का कहना है कि जब स्कूल में यह घटना हुई थी तब कक्षा में कोई शिक्षक मौजूद नहीं था, मगर जब बच्चे की हालत संबंधी पता चला तो वह उसे तुरंत अस्पताल ले गए थे और उसकी सर्जरी तक वह अस्पताल में ही रहे।
वीरवार को भी स्कूल में छुट्टी करने के बाद बच्चों की हालत को जानने के लिए अस्पताल ही जाना था, मगर उससे पहले घायल बच्चों के परिजनों की तरफ से स्कूल में हंगामा करना शुरू कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने तुरंत पुलिस को इस संबंध में सूचित किया। जिनके कहने अनुसार ही स्कूल में बाकी बच्चों की सुरक्षा के लिए मुख्य गेट बंद कर दिए गए थे। क्योंकि उनके पास लगभग 350 से अधिक बच्चे पढ़ते हैं।
ऐसी सूरत में बच्चों की सुरक्षा को लेकर उन्होंने स्कूल के दरवाजे बंद कर दिए थे। मगर उससे पहले पेरेंट्स भी ज्यादा इकट्ठे हो गए थे और बाहर का माहौल खराब हो गया था। इसके बाद पुलिस के आने पर ही स्कूल के दरवाजे खोले गए और बच्चों को उनके अभिभावकों को सौपा गया। ताकि किसी प्रकार की कोई भी अप्रिय घटना ना हो।
